छत्तीसगढ़ में केआईटीजी का उद्घाटन, मांडविया ने इसे ‘जनजातीय प्रतिभाओं के लिए नया युग’ बताया
छत्तीसगढ़ में केआईटीजी का उद्घाटन, मांडविया ने इसे ‘जनजातीय प्रतिभाओं के लिए नया युग’ बताया
रायपुर, 25 मार्च (भाषा) केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को छत्तीसगढ़ से खेलो इंडिया जनजातीय खेलों (केआईटीजी) की शुरुआत को ‘एक अहम उपलब्धि’ करार देते हुए कहा कि यह पहल जनजातीय खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और उसे निखारने के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी।
रायपुर के ‘साइंस कॉलेज’ मैदान में दस दिवसीय केआईटीजी के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मांडविया ने कहा कि यह कार्यक्रम न सिर्फ एक नई खेल प्रतियोगिता की शुरुआत है, बल्कि एक निरंतर चलने वाले आंदोलन की भी शुरुआत है। इसमें देशभर के आदिवासी खिलाड़ी प्रति वर्ष छत्तीसगढ़ में हिस्सा लेने के लिए तैयार रहेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता की शुरुआत नहीं है। खेल सिर्फ पदक के बारे में नहीं हैं। वे जीवन जीने का एक तरीका, संस्कृति और तालमेल सिखाते हैं। वे संतुलन, जज्बा तथा जीतने और सीखने की भावना सिखाते हैं।’’
उन्होंने कहा कि भारत, जिसकी लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 साल से कम उम्र की है, में बहुत क्षमता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में यह ऐतिहासिक रूप से पीछे रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘एक दशक पहले भारत ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में संघर्ष कर रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बदलने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है।’’
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के तहत खेल संस्कृति को बढ़ावा देना एक प्रमुख प्राथमिकता रही है, जिसमें ‘फिट इंडिया’ और ‘खेलो इंडिया’ जैसी पहलें बड़े पैमाने पर भागीदारी को बढ़ावा देती हैं और देशभर में प्रतिभा की पहचान करती हैं।
मांडविया ने कहा कि खेलो इंडिया पहल का विस्तार स्कूल, विश्वविद्यालय, तटीय खेलों और शीतकालीन खेलों तक किया गया है, और जनजातीय खेलों को जोड़ने से यह सुनिश्चित होगा कि दूर-दराज और आदिवासी इलाकों की प्रतिभा को भी पहचाना जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘खेल प्रतिभा सिर्फ शहरों तक ही सीमित नहीं है। यह गांवों, जनजाति समुदाय के इलाकों और तटीय क्षेत्रों में भी मौजूद है। जनजाति समुदाय के खिलाड़ियों ने हमेशा देश का गौरव बढ़ाया है।’’
उन्होंने कहा कि इन इलाकों से जयपाल सिंह मुंडा, एम.सी. मैरी कॉम और बाइचुंग भूटिया जैसे खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन किया है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में शीतकालीन खेलों के अपने दौरे के दौरान उन्होंने देखा कि खेल की लोकप्रियता में काफी बढ़ोतरी हुई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘चार साल पहले बहुत कम दर्शक आते थे, लेकिन अब देशभर से लोग आते हैं। गुलमर्ग में शीतकालीन खेल अब पूरे देश में प्रसिद्ध हो गए हैं और इसने इस इलाके में पर्यटन को बढ़ाने में भी मदद की है।’’
उन्होंने खेल प्रशासन में पारदर्शिता की अहमियत पर भी जोर दिया और कहा कि सरकार ने खुले और निष्पक्ष चयन तरीकों को मजबूत किया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया है कि देश में खेल राजनीति का अखाड़ा नहीं बनना चाहिए और महासंघों को पारदर्शिता के साथ खेल को बढ़ावा देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सुधार किए हैं, जिनमें संसद में राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक पारित करना और युवाओं के लिए सही मौके और संसाधन मुहैया कराने के लिए व्यापक खेल नीति शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले के उस तरीके को खत्म कर दिया है, जहां पसंद या संपर्क अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों के चयन को प्रभावित करते थे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘अब यह पुरानी बात हो गई है। आज योग्यता ही एकमात्र मापदंड है।’’
मांडविया ने आगे कहा कि खिलाड़ियों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए अब चयन पारदर्शी प्रक्रिया से होते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘चयन खुले तौर पर, कैमरे पर तथा केंद्र और राज्य सरकारों के पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में होते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि काबिल और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को वह मौका मिले, जिसके वे हकदार हैं।’’
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए गए सुधारों की श्रृंखला यह सुनिश्चित करेगी कि भारतीय खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखाएं और देश को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों मंचों पर गौरव दिलाएं।
मांडविया ने विश्वास जताया कि भारत आने वाले एशियाई खेलों में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करने के लिए तैयार है, इसलिए उभरती प्रतिभाएं उस मंच पर देश का नाम रोशन करेंगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के प्रयास चल रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुसार देश का लक्ष्य ओलंपिक में शीर्ष-10 में स्थान बनाना है।
उन्होंने कहा कि 2047 तक, जब भारत की आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे, देश को दुनिया के शीर्ष पांच खेल देशों में शामिल करने का लक्ष्य है।
मंत्री ने इस खेल प्रतियोगिता के आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना की और राज्य में खेल विकास के लिए केंद्र से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
मांडविया ने कहा कि केआईटीजी के तहत प्रतियोगिताएं बस्तर, सरगुजा और रायपुर में होंगी, जहां भारतीय खेल प्राधिकरण के दल होनहार खिलाड़ियों की पहचान करेंगे।
उन्होंने कहा कि चुनी गई प्रतिभाओं को सरकारी खर्च पर खेलो इंडिया केंद्रों और उत्कृष्टता केंद्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाएगा।
इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव (जिनके पास खेल विभाग भी है) तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
अधिकारियों ने बताया कि खेलो इंडिया जनजातीय खेलों में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान कुल नौ खेलों का आयोजन होगा। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में पदक दिए जाएंगे, जबकि मल्लखंब और कबड्डी प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि करीब 3,800 प्रतिभागी इन खेलों में हिस्सा लेंगे। आयोजन तीन अप्रैल तक चलेगा। प्रतियोगिताएं रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित की जाएंगी। कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर होंगे। एथलेटिक्स में सर्वाधिक 34 स्वर्ण पदक दिए जाएंगे। तैराकी (24), कुश्ती (18), वेटलिफ्टिंग (16) और तीरंदाजी (10) में भी दो अंकों में स्वर्ण पदक होंगे।
अधिकारियों ने बताया कि हॉकी और फुटबॉल टीम खेल हैं, जिनका आयोजन रायपुर में होगा। एथलेटिक्स जगदलपुर में और कुश्ती सरगुजा में आयोजित की जाएगी।
भाषा संजीव धीरज आनन्द
आनन्द

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