राष्ट्रीय कोच कुलदीप वेदवान को पॉक्सो मामले में पांच साल जेल की सजा

राष्ट्रीय कोच कुलदीप वेदवान को पॉक्सो मामले में पांच साल जेल की सजा

राष्ट्रीय कोच कुलदीप वेदवान को पॉक्सो मामले में पांच साल जेल की सजा
Modified Date: May 21, 2026 / 09:11 pm IST
Published Date: May 21, 2026 9:11 pm IST

चंडीगढ़, 21 मई (भाषा) राष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी कोच कुलदीप वेदवान को सोनीपत की ‘फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट’ ने पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

वेदवान को 2023 में एक नाबालिग खिलाड़ी के साथ यौन उत्पीड़न मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में पेरिस पैरालंपिक से पहले जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

वेदवान को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया और 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।

अदालत ने 15 मई को उन्हें दोषी करार दिया था और बुधवार को सजा सुनाई, जिसके बाद उन्हें फिर से हिरासत में ले लिया गया।

अदालत ने वेदवान को पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 के तहत पांच साल और धारा 12 के तहत तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

यह मामला अप्रैल 2023 का है, जब एक नाबालिग तीरंदाज ने आरोप लगाया था कि वेदवान ने सोनीपत स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र में आयोजित युवा चैंपियनशिप ट्रायल्स के दौरान उसका यौन उत्पीड़न किया।

शिकायत के अनुसार, सात अप्रैल को सुबह करीब चार बजे कोच उसके होटल के कमरे में आया और उसके साथ अनुचित शारीरिक हरकतें कीं।

खिलाड़ी ने आरोप लगाया कि उसने लगभग 15-20 मिनट तक विरोध किया और फिर किसी तरह भागकर दूसरे कमरे में पहुंची, जहां अन्य महिला खिलाड़ी ठहरी हुई थीं।

उसने यह भी आरोप लगाया कि बाद के टूर्नामेंटों में वेदवान उस पर बार-बार अपने कमरे में रुकने का दबाव डालते थे और सहयोग करने पर उसे बड़ी खिलाड़ी बनाने का वादा करते थे। जब खिलाड़ी ने अपने परिवार को इसकी जानकारी दी, तो श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को शिकायत सौंपी गई।

आंतरिक जांच के बाद परिवार को सोनीपत में पुलिस शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई और अगस्त 2023 में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 ए और पॉक्सो अधिनियम की धाराओं 10 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया।

वेदवान को बाद में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, लेकिन 2024 के पेरिस पैरालंपिक से ठीक पहले उन्हें जमानत मिल गई थी।

उनकी अनुपस्थिति में उनकी पत्नी अभिलाषा चौधरी को भारत की पैरा तीरंदाजी कोच नियुक्त किया गया।

पूर्व राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाज और पूर्व सेना कर्मी वेदवान ने पैरा तीरंदाजी में मजबूत पहचान बनाई थी। उन्हें 2018 एशियाई पैरा खेलों के लिए भारत का पैरा तीरंदाजी कोच नियुक्त किया गया था और बाद में तोक्यो पैरालंपिक तक यह जिम्मेदारी बरकरार रही जहां हरविंदर सिंह ने तीरंदाजी में भारत का पहला पैरालंपिक पदक जीता था।

इन उपलब्धियों के आधार पर वेदवान ने आरोप सामने आने से पहले द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए भी आवेदन किया था।

वेदवान विशेष रूप से बिना हाथों वाली पैरा तीरंदाज शीतल देवी को प्रशिक्षित करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने उनके लिए पैरों, कंधे और ठुड्डी की मदद से तीर चलाने की अनोखी तकनीक विकसित की थी। उनके मार्गदर्शन में शीतल देवी ने 2023 एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीता और 2025 में विश्व चैंपियन बनीं।

‘फोकोमेलिया’ नामक दुर्लभ जन्मजात विकार के साथ जन्मी शीतल को जम्मू-कश्मीर में पहचान मिलने के बाद वेदवान की अकादमी में शामिल किया गया था। 2019 में वेदवान ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए चारों अंगों से विकलांग तीरंदाज पायल नाग को भी खोजा और उन्हें कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड खेल परिसर स्थित अपनी अकादमी में लाए।

पिछले महीने बैंकॉक में आयोजित विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज के फाइनल में पायल ने दुनिया की नंबर एक तीरंदाज शीतल देवी को हराया था।

पायल ने सोनीपत से पीटीआई से कहा, ‘‘हम बहुत परेशान हैं। उम्मीद है कि वह जल्द ही इससे बाहर आ जाएंगे। ’’

भाषा नमिता सुधीर

सुधीर


लेखक के बारे में