ओलंपिक को 2050 के गुजरात के निर्माण के लिए माध्यम बनाया जाए: आईओए निदेशक

ओलंपिक को 2050 के गुजरात के निर्माण के लिए माध्यम बनाया जाए: आईओए निदेशक

ओलंपिक को 2050 के गुजरात के निर्माण के लिए माध्यम बनाया जाए: आईओए निदेशक
Modified Date: January 27, 2026 / 05:56 pm IST
Published Date: January 27, 2026 5:56 pm IST

अहमदाबाद, 27 जनवरी (भाषा) अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक अकादमी (आईओए) के निदेशक माकिस असिमाकोपोलोस ने मंगलवार को ओलंपिक खेलों के लिए तैयार किए जाने वाले बुनियादी ढांचे के सतत उपयोग की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि खेल के इस महाकुंभ को अंतिम लक्ष्य की तरह देखने की जगह दीर्घकालिक विकास का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) में आयोजित दूसरे अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक अनुसंधान सम्मेलन में विशेषज्ञों, छात्रों और शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ओलंपिक खेलों की मेजबानी की आकांक्षा रखने वाले देशों को राष्ट्रीय खेल महासंघों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि खेल आयोजनों के साथ कोचों और खिलाड़ियों का विकास भी किया जाये और ओलंपिक मूल्यों को स्कूली शिक्षा प्रणाली में एकीकृत किया जा सके।

भारत गुजरात के अहमदाबाद में 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी हासिल करने की कोशिश में है।

असिमाकोपोलोस ने कहा कि ओलंपिक की योजना बनाते समय गुजरात को भविष्य के लिए तैयार करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, विशेषकर 2050 तक के विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए।

उन्होंने कहा, “आपको सिर्फ 2036 के खेलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आपको 2050 के बारे में सोचना होगा। ‘गुजरात 2050’ जैसी एक परिकल्पना तैयार करें और वहां तक पहुंचने के लिए ओलंपिक को एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करें। उसका लक्ष्य सिर्फ खेलों के आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहये।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ओलंपिक योजना के केंद्र में स्थिरता होनी चाहिए और बोली प्रक्रिया तथा तैयारियों के दौरान विकसित किया जाने वाला समूचा बुनियादी ढांचा और संसाधन स्थानीय समुदायों के दीर्घकालिक उपयोग के लिए डिज़ाइन किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा, “खेल क्षेत्र के विकास के लिए माध्यम हैं, न कि अंतिम लक्ष्य।’’

असिमाकोपोलोस ने कहा कि ओलंपिक की मेजबानी खेलों से आगे बढ़कर संस्कृति, शिक्षा और ओलंपिक मूल्यों को विश्व पटल पर प्रदर्शित करने का मंच भी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “जब आप ओलंपिक के लिए जाते हैं, तो आप दुनिया को बताते हैं कि आप सिर्फ खेल के लिए नहीं, बल्कि संस्कृति, शिक्षा और ओलंपिक आंदोलन के मूल्यों के लिए भी मौजूद हैं।”

भाषा आनन्द नमिता

नमिता


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