तीरंदाजी विश्व कप में सिमरनजीत और साहिल ने भारत को पदक की दौड़ में बनाए रखा
तीरंदाजी विश्व कप में सिमरनजीत और साहिल ने भारत को पदक की दौड़ में बनाए रखा
शंघाई, आठ मई (भाषा) रिकर्व तीरंदाज सिमरनजीत कौर और कंपाउंड तीरंदाज साहिल जाधव ने शुक्रवार को यहां उतार-चढ़ाव भरे अभियान में भारत के लिए अप्रत्याशित रूप से शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने पहले तीरंदाजी विश्व कप में पदक की उम्मीदें बरकरार रखी हैं।
एशियाई खेलों की टीम कांस्य पदक विजेता सिमरनजीत ने विश्व कप के दूसरे चरण में सेमीफाइनल में पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से मिले अवसर का भरपूर फायदा उठाया। वह इससे पहले क्वालीफाइंग दौर में दीपिका कुमारी से तीन अंक पीछे रहने के कारण भारतीय महिला टीम में जगह बनाने से चूक गई थीं।
हरियाणा की 27 वर्षीय खिलाड़ी ताइवान की किशोरी फोंग यू झू को सीधे सेटों में 6-0 (27-24, 28-26, 29-26) से हराकर विश्व कप में अपना पहला पदक जीतने से सिर्फ एक जीत दूर है।
इससे पहले फोंग ने दूसरे दौर में भारत की शीर्ष क्रम की तीरंदाज अंकिता भकत को चौंका दिया था।
सिमरनजीत ने क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे की 19 वर्षीय खिलाड़ी के खिलाफ नौ तीरों में से सिर्फ छह अंक गंवाते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन जारी रखा।
उनके सामने अब सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया की विश्व नंबर एक खिलाड़ी कांग चेयॉन्ग की चुनौती होगी। यह उनके करियर की सबसे कठिन चुनौती है। इस मुकाबले में हारने पर भी उनके पास प्लेऑफ के जरिए कांस्य पदक जीतने का मौका रहेगा।
भारत की अनुभवी खिलाड़ी दीपिका कुमारी और किशोरी कुमकुम मोहद प्री-क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं, लेकिन मजबूत प्रतिद्वंदियों से हार गईं।
दीपिका को दक्षिण कोरिया की चेयॉन्ग से हार का सामना करना पड़ा जो मौजूदा विश्व चैंपियन और तोक्यो ओलंपिक टीम स्वर्ण पदक विजेता हैं। वहीं कुमकुम को मैक्सिको की अनुभवी खिलाड़ी एलेजांद्रा वालेंसिया से हार मिली, जो दो बार की ओलंपिक टीम कांस्य पदक विजेता हैं।
धीरज बोम्मादेवरा पुरुषों के रिकर्व वर्ग में भारतीयों में सर्वश्रेष्ठ रहे। उनका अभियान भी प्री-क्वार्टर फाइनल में फ्रांस के खिलाड़ी जीन-चार्ल्स वलाडोंट से 0-6 से हारकर समाप्त हुआ।
अन्य भारतीय खिलाड़ियों में अनुभवी तरुंदीप राय तीसरे दौर में कोरिया के सियो मिंगी से हार गए जबकि यशदीप भोगे दूसरे दौर में तुर्की के पूर्व ओलंपिक चैंपियन मेते गाजोज से सीधे सेटों में हार गए।
गाजोज ने बाद में पांच बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता किम वूजिन को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
भारतीय पुरुषों में पूर्व नंबर एक अतनु दास का प्रदर्शन सबसे खराब रहा और वह बांग्लादेश के मोहम्मद मिशाद प्रधान के हाथों पहले ही दौर में हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए।
पारंपरिक रूप से भारत की ताकत मानी जाने वाली कंपाउंड स्पर्धाओं में पहले बड़ी निराशा हाथ लगी थी क्योंकि कोई भी भारतीय टीम पदक राउंड तक नहीं पहुंच सकी।
पुरुष, महिला और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में भारत पोडियम पर जगह बनाने में नाकाम रहा जिससे चार महीने से भी कम समय में होने वाले एशियाई खेलों से पहले चिंताएं बढ़ गईं।
टीम स्पर्धाओं में मिली हार के बाद सारी उम्मीदें व्यक्तिगत स्पर्धाओं पर टिकी थीं, जहां साहिल पदक की दौड़ में बचे एकमात्र भारतीय खिलाड़ी के रूप में उभरे।
पिछले महीने ही विश्व कप में पदार्पण करने वाले इस 25 वर्षीय तीरंदाज ने रोमांचक शूट-ऑफ में ऑस्ट्रिया के निको वीनर को हराकर पुरुष कंपाउंड स्पर्धा के सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
मैच शुरू से अंत तक कांटे की टक्कर का रहा। दोनों तीरंदाजों ने 15 तीरों में सिर्फ तीन अंक गंवाए।
पहले सेट में दोनों खिलाड़ियों के एक जैसे शानदार प्रदर्शन के बाद साहिल ने दूसरे सेट में भी बिना कोई गलती किए एक अंक की बढ़त बना ली। साहिल के दो अंक गंवाने के बाद तीसरे सेट में वीनर ने स्कोर 88-88 से बराबर कर दिया।
चौथे सेट में दोनों ने 29 अंक बनाए और अंतिम सेट में 30 अंक बनाकर मैच को शूट-ऑफ तक पहुंचा दिया। साहिल ने शानदार संयम बनाए रखते हुए एक और सटीक निशाने से 10-9 से जीत हासिल की।
विश्व कप पदक से एक जीत दूर साहिल सेमीफाइनल में फ्रांस के निकोलस गिरार्ड का सामना करेंगे।
क्वालीफिकेशन में आठवें स्थान पर रहने के बाद सीधे तीसरे राउंड में पहुंचे साहिल ने अंतिम 32 चरण में अपने अनुभवी साथी खिलाड़ी अभिषेक वर्मा को 149-147 से हराया और फिर प्री-क्वार्टर फाइनल में जर्मनी के स्वेन फ्लस को 149-146 से मात दी।
कुशल दलाल ने भी क्वार्टर फाइनल में निराशाजनक हार से पहले शानदार प्रदर्शन किया। उन्हें डेनमार्क के मार्टिन डैम्सबो ने 147-147 से मुकाबला बराबर रहने के बाद शूट-ऑफ में हराया। शूट-ऑफ में भी दोनों तीरंदाजों ने 10 अंक वाले निशाने साधे थे, लेकिन डैम्सबो का तीर केंद्र के अधिक करीब था।
क्वालीफाइंग दौर में सातवें स्थान के साथ भारत के शीर्ष कंपाउंड तीरंदाज रहे पूर्व विश्व चैंपियन ओजस देवताले एस्टोनिया के रॉबिन जाटमा से 146-150 से हारकर पहले ही दौर में बाहर हो गए।
महिला कंपाउंड वर्ग में पूर्व विश्व चैंपियन अदिति स्वामी को भी क्वार्टर फाइनल में एस्टोनिया की लिसेल जाटमा के हाथों 147-147 से करीबी शूट-ऑफ में हार का सामना करना पड़ा। अदिति को भी कुशल की तरह ही शूट-ऑफ में 10 अंक वाला निशाना साधने के बावजूद निराशा का सामना करना पड़ा।
इससे पहले लिसेल ने विश्व कप में कई बार पदक जीत चुकीं ज्योति सुरेखा वेन्नम को मात दी थी।
मधुरा धामनगांवकर और प्रगति तीसरे दौर में बाहर हो गईं।
भाषा आनन्द नमिता
नमिता

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