यह पारी मेरे आत्मविश्वास के लिए अहम थी : केकेआर के उप कप्तान रिंकू

यह पारी मेरे आत्मविश्वास के लिए अहम थी : केकेआर के उप कप्तान रिंकू

यह पारी मेरे आत्मविश्वास के लिए अहम थी : केकेआर के उप कप्तान रिंकू
Modified Date: April 19, 2026 / 08:35 pm IST
Published Date: April 19, 2026 8:35 pm IST

कोलकाता, 19 अप्रैल (भाषा) रिंकू सिंह ने रविवार को यहां नाबाद 53 रन की पारी खेलकर राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ आईपीएल के तनावपूर्ण मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स को इस सत्र की पहली जीत दिलाने के बाद कहा कि ‘जोश तो था लेकिन कोई हिचकिचाहट नहीं थी’।

जब लक्ष्य का पीछा करना मुश्किल लग रहा था, तब रिंकू ने संयम और नियंत्रित आक्रामकता का तालमेल बिठाते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया।

उन्होंने मैच के बाद कहा, ‘‘कभी-कभी ऐसा होता है जब कुछ चीजें आपके हिसाब से नहीं होतीं तो आप वह जोश महसूस करते हैं। लेकिन ऐसा नहीं था कि मैं अपने शॉट खेलने को लेकर हिचकिचा रहा था या मुझे कोई दुविधा थी। मेरी सोच यही थी कि खेल को आखिर तक ले जाऊं। ’’

इस सत्र में एक बड़ी पारी की तलाश में रहे इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने शुरुआत में मिले एक जीवनदान का पूरा फ़ायदा उठाया और मैच का रुख केकेआर के पक्ष में मोड़ दिया।

रिंकू ने कहा, ‘‘कभी-कभी ऐसा ही होता है। दिमाग ठीक से काम नहीं करता और आप ऐसे शॉट्स खेल बैठते हैं। लेकिन शुक्र है कि किस्मत मेरे साथ थी और आखिरकार हम मैच जीत गए। ’’

रिंकू ने माना कि इस पारी का उन्हें लंबे समय से इंतजार था और यह उनके आत्मविश्वास के लिए बहुत जरूरी थी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने काफी पारियां खेली थीं और एक बड़ी पारी का इंतजार कर रहा था। यह मेरे लिए बहुत अच्छी पारी थी और मेरे आत्मविश्वास के लिए भी बहुत अहम थी। ’’

कप्तान अजिंक्य रहाणे ने खास तौर पर रिंकू और गेंदबाजों की तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे रिंकू, अनुकूल (रॉय) और वरुण (चक्रवर्ती) के लिए सच में बहुत खुशी है। जिस तरह से वरुण ने गेंदबाज़ी की। अनुकूल का घरेलू टूर्नामेंट भी शानदार रहा। ’’

राजस्थान के कप्तान रियान पराग ने क्षेत्ररक्षण में हुई उन गलतियों पर अफसोस जताया जो मैच का नतीजा तय करने में अहम साबित हुईं।

पराग ने कहा, ‘‘मुझे लगा था कि यह 170 रन वाला विकेट है, लेकिन हम 10 रन पीछे रह गए। गलती हमारी तरफ से हुई। हम कैच नहीं छोड़ सकते, इसी वजह से हम मैच हार गए। ’’

रिंकू का कैच उनकी पारी की शुरुआत में ही छूट गया था।

भाषा नमिता आनन्द

आनन्द


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