बाराबंकी मस्जिद मामला: उच्च न्यायालय ने विवेचना के दौरान आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगायी

बाराबंकी मस्जिद मामला: उच्च न्यायालय ने विवेचना के दौरान आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगायी

बाराबंकी मस्जिद मामला: उच्च न्यायालय ने विवेचना के दौरान आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगायी
Modified Date: November 29, 2022 / 08:22 pm IST
Published Date: May 31, 2021 4:00 pm IST

लखनऊ, 31 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने बाराबंकी के रामसनेहीघाट तहसील परिसर में बनी मस्जिद ढहाने के मामले में दर्ज प्राथमिकी पर सरकारी अधिवक्ता से तीन हफ़्तों में दस्तावेजों में हेराफेरी के साक्ष्‍य प्रस्‍तुत करने के निर्देश दिए।

साथ ही पुलिस को हिदायत दी है कि राजस्व दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोप में रामसनेही घाट पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में जब तक पुलिस रिपोर्ट नहीं दाखिल कर दी जाती तब तक नामजद आरोपियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करे।

पीठ ने इसके साथ ही याचीगण को भी ताकीद किया है कि वे विवेचना में सहयोग करेंगे और जब-जब आवश्यकता होगी वे पूछताछ के लिए उपलब्ध रहेंगे।

यह आदेश न्यायमूर्ति ए आर मसूदी व न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने मुश्‍ताक अली आदि की ओर से प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली एक रिट याचिका पर पारित किया।

गौरतलब है कि उक्त मस्जिद को रामसनेही घाट प्रशासन ने अवैध बताकर कानूनी कार्रवाई करते हुए 17 मई 2021 को गिरा दिया था। साथ ही इस मामले में याचीगण के खिलाफ सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी कर तहसील प्रांगण में उक्त जमीन को वक्फ सम्पत्ति दिखाकर वहां रिहायशी इमारत बनाने का अपराध कारित करने के आरोप में उन पर धोखाधड़ी, दस्तावेजों में हेराफेरी आदि धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करा दी थी।

याचीगण ने प्राथमिकी को चुनौती देते हुए कहा था कि प्रशासन ने जो आरेाप लगाये है वे सब झूठे व मनगढ़ंत हैं।

वहीं, सरकारी वकील ने कहा कि इस मामले की विवेचना अभी जारी है और उन्हें पुलिस की ओर से अभी पूरी जानकारी लेने के लिए कुछ समय की आवश्यकता है। इस पर अदालत ने तीन सप्ताह का समय देते हुए मामले में याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तारी से राहत देते हुए अंतरिम आदेश पारित किया।

भाषा सं आनन्द शफीक


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