चूल्हे पर शिवराज की पत्नी ने बनाई रोटी, चौके पर बैठकर खाए सीएम
चूल्हे पर शिवराज की पत्नी ने बनाई रोटी, चौके पर बैठकर खाए सीएम
भोपाल, मध्य प्रदेश। वक्त आगे बढ़ता चला जाता है और जीवन से जुड़ी चीजें पीछे छूटती चली जाती हैं। कभी-कभी फुर्सत मिलते ही आदमी को याद आता है पुराना वक्त तो मन मचल उठता है, उसी दौर में लौटने का या कम से कम उन यादों को ताजा कर लेने का। आज आपसे ये चर्चा इसलिए कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा दिन पर इसी चौके-चूल्हे की याद ताजा की और इसकी तस्वीरें अपने ट्वीटर पर शेयर की, जो हम आपसे साझा कर रहे हैं।
आज पारंपरिक चूल्हे पर बने भोजन का निवास पर आनंद लिया और धर्मपत्नी एवं बच्चों के साथ ने पुरानी स्मृतियों को ताज़ा कर दिया। व्यस्तताओं के बीच परिवार के साथ ऐसे छोटे-छोटे मधुर क्षण सदैव मुझे एक नई ऊर्जा से भर देते हैं। pic.twitter.com/7RAj9B8f1z
— ShivrajSingh Chouhan (@ChouhanShivraj) December 25, 2017
आपको याद होगा, पहले के दौर में जब रसोई गैस सिलेंडर या इंडक्शन वगैरह नहीं हुआ करते थे तो लोग ईंट-मिट्टी या सिर्फ मिट्टी से बने चूल्हों पर खाना पकाया करते थे। उस दौर में चूल्हों में लकड़ी या कहीं-कहीं कोयले या फिर धान-गेहूं की भूसी का भी इस्तेमाल किया करते थे। अभी भी गांवों में कहीं-कहीं ऐसे चूल्हे दिखने को मिल जाते हैं।
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हो सकता है कि आपने कुछ लोगों से ये सुना भी हो कि उन चूल्हों पर बनने वाले खाने का स्वाद ही कुछ और होता था! उस दौर में परिवार डायनिंग टेबल या कुर्सी-टेबल पर बैठकर खाना नहीं खाया करता था, बल्कि रसोई घर में ही चौके पर बैठकर खाते थे और इसे ही मिलाकर कहा जाता रहा है चौका-चूल्हा।
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वैसे उज्ज्वला योजना की जब शुरुआत हुई थी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पारंपरिक चूल्हों में इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ियों, कोयलों से निकलने वाला धुआं रसोईघर में काम करने वाली महिलाओं की आंखों, सीने के लिए नुकसानदेह होती है साथ ही पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है। इसी मकसद से रसोई गैस सिलेंडरों के इस्तेमाल को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहन देने पर सरकारें काम कर रही हैं, लेकिन दिल है कि मानता नहीं तो शिवराज सिंह चौहान का भी दिल नहीं माना और किस आनंद के साथ उन्होंने पारंपरिक चौके-चूल्हे पर बने खाने का स्वाद लिया, ये तो आप देख ही रहे हैं।
वेब डेस्क, IBC24

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