गुरूवार को राजधानी रायपुर में पुलिस और प्रशासन की जैसी मुस्तैदी दिखी वो शायद अब तक कभी नहीं दिखी थी। पुलिस-प्रशासन ने ठान लिया था कि एक भी किसान या किसान नेता को बूढ़ातालाब धरना स्थल नहीं पहुंचने देना है… और ऐसा हुआ भी। जो भी किसान बूढ़ातालाब की ओर बढ़ते, चप्पे चप्पे पर तैनात पुलिस उन्हें गिरफ्तार करती चली गई। पहली गिरफ्तारी करीब 30 समर्थकों के साथ संकेत ठाकुर की हुई। वह भी धरना स्थल से करीब 100 मीटर पहले ही। उसके बाद द्वारिका साहू दर्जनभर समर्थक के साथ धरना स्थल की ओर बढ़े लेकिन उन्हें भी 200 मीटर पहले गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद अरविंद नेताम समेत करीब दर्जनभर किसान नेता और समर्थक रास्ते में ही गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल भेज दिए गए। जिस आंदोलन में करीब 40 हजार किसानों के राजधानी पहुंचने का अनुमान था, वहां यह आंकड़ा 150 तक नहीं पहुंच सका। किसान नेता इसे सरकार के दमन और आतंक की देन बता रहे हैं। द्वारका साहू ने कहा किसानों को घरों से निकलने नहीं दिया गया, घर से, सड़क से किसानों को गिरफ्तार किया जा रहा है.. सरकार की कलई खुल गई है। वहीं अरविंद नेताम ने कहा यह सरकार की हिटलरशाही है, पूरे जिलों में 144 लागू कर किसानों की आवाज दबाने की कोशिश है.. आप आगे देखंेगे जनता इनकी पार्टी पर ही 144 लगा देगी।
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दिलचस्प बात यह रही कि प्रशासन ने जिस आंदोलन को दबाने के लिए धारा 144 लगाई, उसमें एक भी गिरफ्तारी धारा 144 के उल्लंघन में नहीं हुई। किसान और किसान नेताओं की गिरफ्तारी 144 के उल्लंघन की आशंका में 151 के तहत की गई.. और सारे के सारे जेल भी भेज दिए गए। डीएसपी सत्येंद्र पाण्डेय ने बताया कि धारा 144 लागू थी… लेकिन ये लोग सड़कों पर उतर आए तो हमने धार 151 के तहत इन्हें गिरफ्तार किया है। धारा 144 के तहत किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया। इसके वायलेशन की आशंका में इन्हें गिरफ्तार किया गया है। किसान महासंघ भले ही किसानों की रैली निकालकर सीएम हाउस घेराव नहीं कर सका.. लेकिन सरकार ने उन्हें रोकने में जितनी ताकत झोंक दी..उससे यह तो साफ हो ही जाता है कि सरकार को किसान महासंघ की ताकत का अहसास तो है।
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