जनता मांगे हिसाब: सियासी उठापटक के गढ़ भिंड से नदारद आम लोगों के मुद्दे

Ads

जनता मांगे हिसाब: सियासी उठापटक के गढ़ भिंड से नदारद आम लोगों के मुद्दे

  •  
  • Publish Date - May 19, 2018 / 10:43 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:13 PM IST

अब बात मध्यप्रदेश की भिंड विधानसभा की…क्या है सियासी बिसात? कितना हुआ विकास ये जानने से पहले नजर डालते हैं विधानसभा की प्रोफाइल पर….

सिंध और कुंआरी प्रमुख नदियां

कुल मतदाता- 2 लाख 45 हजार 351 

पुरुष मतदाता- 1 लाख 36 हजार 948

महिला मतदाता- 1 लाख 8 हजार 403 

अल्पसंख्यक मतदाता- 36 हजार 851

वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा

नरेंद्र सिंह कुशवाह बीजेपी विधायक

भिंड की सियासत

भिंड विधानसभा अपनी सियासी उठा-पटक के लिए जानी जाती है…भिंड कभी किसी पार्टी का गढ़ नहीं बन पाया..तभी तो कभी कमल खिला तो कभी कांग्रेस का परचम लहराया. वर्तमान में भिंड विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा है..अब चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो गई है तो चुनावी तैयारियों के साथ टिकट की दावेदारी भी शुरु हो गई है ।

कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी, जीत का परचम लहराती आ रही है भिंड विधानसभा पर…बीते चुनाव में बीजेपी के नरेंद्र सिंह कुशवाह ने जीत दर्ज की…अब फिर चुनाव नजदीक हैं तो चुनावी शोरगुल भिंड में सुनाई देने लगा है..इसी शोरगुल के बीच टिकट के दावेदार भी अपनी आवाज बुंलद कर रहे हैं…बीजेपी में टिकट के दावेदारों की बात करें तो वर्तमान विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह प्रबल दावेदार हैं.. 2008 में टिकट नहीं मिलने से नरेंद्र सिंह कुशवाह ने समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा था लेकिन इस चुनाव में ना बीजेपी जीती ना सपा, कांग्रेस ने जीत का झंडा फहराया.

इसके अलावा कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए चौधरी राकेश सिंह भी दावेदार हैं..राकेश सिंह भिंड से 5 बार विधायक भी रह चुके हैं…अब बात कांग्रेस की करें तो फिलहाल कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आता…लेकिन टिकट के दावेदार जरुर सामने आने लगे हैं…दावेदारों में सबसे पहला नाम है कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रमेश दुबे का…रमेश दुबे पहले भी निर्दलीय चुनाव लड़ चुके है…इसके अलावा बीजेपी छोड़कर सपा में शामिल हुए संजीव कुशवाह भी कांग्रेस के उम्मीदवार हो सकते हैं..बीते चुनाव में सपा से संजीव कुशवाह ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी।इसलिए हो सकता है संजीव कुशवाह को कांग्रेस चुनाव मैदान में उतारे ।

भिंड के मुद्दे

सियासी दौड़ में तो आगे है भिंड लेकिन विकास की दौड़ में है पीछे..शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार सभी मोर्चो पर फेल नजर आता है विकास के मानचित्र पर भले ना दिखाई दे लेकिन अपराध के नक्शे पर अलग दिखाई देता है क्योंकि अपराध का ग्राफ भिंड में लगातार बढ़ रहा है ।

भिंड विधानसभा में सियासी उठा-पटक के बीच विकास कहीं नजर नहीं आता…आज भी लोग बुनियादी सुविधाएं के इंतजार में हैं. समस्याएं एक नहीं कई हैं. जिनसे जूझ रही है जनता. स्कूली शिक्षा हो या फिर उच्च शिक्षा दोनों में पिछड़ा है भिंड..स्कूलों में शिक्षकों की कमी अब तक पूरी नहीं हो सकी है तो वहीं उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी के चलते छात्र बड़े शहरों का रुख करने को मजबूर हैं.

शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं… गांवों की तो छोड़िए जिला अस्पताल तक डॉक्टरों के इंतजार में है. इसके अलावा बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है…कहने को तो मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र है लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार मिल ही नहीं पा रहा है नतीजा लगातार पलायन कर रहे हैं लोग। विकास में भले पिछड़ा हो भिंड लेकिन अपराध के मामले में आगे है ।

 

 

वेब डेस्क, IBC24