छत्तीसगढ़ के जनकवि लक्ष्मण मस्तुरिया का निधन

छत्तीसगढ़ के जनकवि लक्ष्मण मस्तुरिया का निधन

छत्तीसगढ़ के जनकवि लक्ष्मण मस्तुरिया का निधन
Modified Date: November 29, 2022 / 08:32 pm IST
Published Date: November 3, 2018 10:04 am IST

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जनकवि लक्ष्मण मस्तुरिया का शनिवार को निधन हो गया। वे वायरल बुखार से पीड़ित थे। शनिवार सुबह सीने में दर्द की शिकायत पर उन्हें अस्पताल ले जाने के दौरान उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार रविवार को 11 बजे महादेव घाट में होगा। छत्तीसगढ़ी साहित्य और कला जगत में मस्तुरिया बड़ा नाम थे

म्स्तुरिया के निधन की जानकारी के उनके बेटे रमेश गोस्वामी ने दी। उनका जन्म 07 जून 1949  को बिलासपुर के मस्तुरी में हुआ था। उनकी प्रमुख कृतियों में मोर संग चलव रे, हमू बेटा भुइंया के, गंवई-गंगा, धुनही बंसुरिया, माटी कहे कुम्हार से, सिर्फ सत्य के लिए आदि हैं। वे मूलतः गीतकार थे और उन्होंने मोर संग चलव रे, मैं छत्तीसगढ़िया अंब रे आदि लोकप्रिय गीतों की रचना की। इसमें से मोर संग चलव रे तो छत्तीसगढ़ के जन-जन के होठों पर बसा हुआ है।

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वे 1974 में लाल किले पर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शायर मुकीम भारती के साथ कवि सम्मेलन में शामिल हुए थे।  आकाशवाणी, दूरदर्शन और कवि सम्मेलनों के मंच से होते हुए लक्ष्मण छत्तीसगढ़ी फिल्मों में भी गीत लिखते रहे। उनकि 77 छत्तीसगढ़ी कविताओं का संग्रह मोर संग चलववर्ष 2003 में, इकसठ छत्तीसगढ़ी निबन्धों का संग्रह माटी कहे कुम्हार सेवर्ष 2008 में और इकहत्तर हिन्दी कविताओं का संकलन सिर्फ सत्य के लिएभी वर्ष 2008 में प्रकाशित हुआ। इसके पहले छत्तीसगढ़ के क्रांतिकारी अमर शहीद वीर नारायण सिंह की जीवन-गाथा पर आधारित उनकी एक लम्बी कविता सोनाखान के आगीभी पुस्तक रूप में आ चुकी है।

 

वेब डेस्क, IBC24


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