12 साल बाद पानी से बाहर आया शंखोद्वार मंदिर

12 साल बाद पानी से बाहर आया शंखोद्वार मंदिर

12 साल बाद पानी से बाहर आया शंखोद्वार  मंदिर
Modified Date: November 29, 2022 / 08:52 pm IST
Published Date: May 29, 2018 6:29 am IST

नीमच।  जिले मे 12 साल बाद पानी से एक मंदिर निकल कर सामने आया है जिसे प्रसिद्ध  गंगा माता शंखोद्वार  मंदिर  बताया जा रहा है।  प्रसिद्ध श्री गंगा माता शंखोद्वार प्राचीन मंदिर गांधी सागर बैक वाटर से करीब 12 साल बाद बाहर आ गया है। महाभारत काल के माने जाने वाले इस मंदिर को देखने और पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है।

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इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार शंखोद्वार मंदीर महाभारत कालिन माना जाता है। मान्यतानुसार पांडवो ने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय इस क्षेत्र मे भी बिताया था। यहाँ भीम ने शंखासुर राक्षस का वध किया था।मृत्यु से पूर्व शंखासुर ने पांडवो से वरदान मांगा की उसे भी लोग याद रखे और तब पांडवो ने यहा शिवलिंग की स्थापना की और वरदान दिया कि अकाल मृत्यु के शिकार लोगो का यहा तर्पण करने से उन्हे मोक्ष की प्राप्ति होगी। इस बात का उल्लेख महाभारत और भागवत पुराण मे बताया जाता है। 

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 जानकार  मंदिर के वर्तमान स्वरूप् को वास्तु और शिल्प  आधार पर इसे 11 वी शताब्दी का निर्माण मानते है। पहले  मंदिर  केवल खम्बो पर खडा व चारो और से खुला चबुरते पर था। बांध बनने के बाद पानी व भारी चीजो के टकराने से मंदीर क्षतिग्रस्त  हो गया था। जिसे दो दशक  पुर्व सहारा देने के लिए कुछ निर्माण करवाया। मंदीर के सभा मंडप मे नंदी की प्रतिमा स्थापित है। मंडप की छत पर अश्रव, गज ओर क्रडा चक्र बने हुए है। गर्भ गृह मे शंखोद्वार महादेव शविलिंग के रूप मे विराजमान जो जमीन से करीब एक फीट नीचे खोल मे स्थापित है। शिवलिंग  के चारो और तीन घेरे अलग अलग चौड़ाई  के घेरे बने है। कहा जाता है कि शिवलिंग 6 माह जमीन के उपर 6 माह नीचे रहता है। जैसे जैसे चम्बल नदी का जल स्तर बढता है वैसे वैसे शिवलिंग ऊपर  की ओर आता है।दरसल मंदीर के डूब क्षेत्र से बाहर आने का कारण गांधीसागर डेम से राजस्थान को अधिक पानी देना बताया जा रहा है। चंबल नदी पर बने गांधीसागर बांध के निर्माण के वक्त सैकड़ो  गाव डूब मे चले गये थे। जिला मुख्यालय से करीब 80 किलो मीटर और गांधीसागर डेम के डूब क्षेत्र मे बसे इस मंदीर तक पहुचने के लिए नीमच से करीब 65 किमी दूर चचौर गाव जाना पडता है। यहा से करीब 15 किलो मीटर कच्चे रास्ते मे करीब 7 से 8 किलो मीटर गांध सागर डेम डूब क्षेत्र मे चलना पडता है । जब गांधी सागर डेम मे पानी भरा होता है उस समय मंदीर का शिखर  करीब 6 से 7 फिट पानी मे डूबा रहता है। जबकि मंदीर करीब 20 से 22 फिट जमीन से उपर बना है। पुराने मंदीर के डूब ने पर नया मंदीर रामपुरा मे बनया गया है। जहा प्रतिवर्ष मेले का आयोजन होता है। मेला पशु मेले के नाम से काफी ख्यात है।

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 राजु नाथ मंदीर के सेवादार कहते हैं कि  मंदीर का भागवत मे उल्लेख है शिवलिंग 6 माह उपर रहता है 6 माह नीचे। यह द्वापर युग से यह मंदीर है। यहा शंखासूर राक्षस का वध किया था। यह मंदीर से करीब 20 फीट ऊँचा है ।और इस मंदिर में प्रतिवर्ष मेला भी लगता है जहां बहुत अधिक संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। 

वेव डेस्क -IBC24

 


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