उच्चतम न्यायालय की सुनवाई से पहले सेंट्रल मार्केट में छह भूखंडों पर अतिक्रमण-रोधी कार्रवाई

उच्चतम न्यायालय की सुनवाई से पहले सेंट्रल मार्केट में छह भूखंडों पर अतिक्रमण-रोधी कार्रवाई

उच्चतम न्यायालय की सुनवाई से पहले सेंट्रल मार्केट में छह भूखंडों पर अतिक्रमण-रोधी कार्रवाई
Modified Date: September 16, 2026 / 04:24 pm IST
Published Date: September 16, 2026 4:24 pm IST

मेरठ, 16 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश में मेरठ के सेंट्रल मार्केट मामले में 21 सितंबर को उच्चतम न्यायालय में होने वाली सुनवाई से पहले बुधवार को आवास विकास परिषद ने शास्त्रीनगर स्थित छह भूखंडों पर अतिक्रमण-रोधी कार्रवाई शुरू की।

पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान इलाके में बाड़ लगाकर आम लोगों की आवाजाही रोक दी। आवास विकास परिषद के अधिकारियों के अनुसार, छह में से चार भूखंडों पर बुलडोजर से अवैध निर्माण का हिस्सा हटाया जा चुका है और बाकी पर कार्रवाई जारी है।

परिषद के उपायुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि पूर्व में सील की गई 44 संपत्तियों में से छह पर बुधवार को कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इनमें से किसी भी संपत्ति का मानचित्र स्वीकृत नहीं था।

उन्होंने बताया कि अन्य संपत्ति मालिक निर्धारित मानकों के अनुसार अपने प्रतिष्ठानों के अवैध हिस्से को स्वयं हटा रहे हैं।

व्यापारियों का कहना है कि दो सितंबर को मेरठ बंद के दौरान उनलोगों को यह आश्वासन दिया गया था कि उच्चतम न्यायालय में सुनवाई से पहले अतिक्रमण-रोधी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

उनका कहना है कि इस आश्वासन के बावजूद सुनवाई से कुछ दिन पहले कार्रवाई शुरू होने से उनमें नाराजगी है।

हालांकि, बुधवार को इस कार्रवाई के दौरान किसी व्यापारी या अन्य व्यक्ति ने विरोध नहीं किया। पुलिस की मौजूदगी में परिषद की टीम ने कार्रवाई जारी रखी और सेंट्रल मार्केट में आम लोगों के प्रवेश पर रोक रही।

उच्चतम न्यायालय ने 17 दिसंबर, 2024 के एक आदेश में कहा था कि केवल प्रशासनिक देरी, समय बीतने या वित्तीय निवेश के आधार पर अनधिकृत निर्माण को वैध नहीं ठहराया जा सकता तथा अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के लिए कई निर्देश जारी किए।

न्यायालय ने कहा था कि निर्माण के बाद के उल्लंघनों पर भी त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, जिसमें अवैध हिस्से को ध्वस्त करना और दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाना शामिल है।

पीठ ने मेरठ के शास्त्री नगर स्थित एक आवासीय भूखंड पर अनधिकृत व्यावसायिक निर्माण को ध्वस्त करने के फैसले को भी बरकरार रखा और शहरी नियोजन कानूनों का कड़ाई से पालन करने एवं अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उच्चतम न्यायालय राजेंद्र कुमार बड़जात्या द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2014 के उस फैसले के खिलाफ दायर अपील सहित कई अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें शास्त्री नगर स्थित भूखंड पर अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया था।

भाषा सं जफर सुरेश

सुरेश


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