कांस्टेबल ने लखनऊ पुलिस आयुक्त कार्यालय में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, जांच के आदेश
कांस्टेबल ने लखनऊ पुलिस आयुक्त कार्यालय में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, जांच के आदेश
लखनऊ, सात मई (भाषा) उत्तर प्रदेश पुलिस के एक कांस्टेबल द्वारा कथित तौर पर लखनऊ पुलिस आयुक्त कार्यालय में कर्मियों की तैनाती में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाला एक वीडियो बृहस्पतिवार को सामने आने के बाद जांच के आदेश दिए गए।
वीडियो में वर्दीधारी व्यक्ति ने खुद को लखनऊ आयुक्त कार्यालय की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात कांस्टेबल सुनील कुमार शुक्ला के रूप में बताया। उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए और आरोप लगाते हुए सुना जा सकता है कि आईपीएस अधिकारी पुलिस बल में ‘भ्रष्ट सामंती व्यवस्था’ चला रहे हैं।
कांस्टेबल ने कथित वीडियो में कहा, “माननीय मुख्यमंत्री, मैं आपका ध्यान लखनऊ पुलिस आयुक्त कार्यालय और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में कथित तौर पर आईपीएस अधिकारियों द्वारा चलाई जा रही भ्रष्टाचार से प्रेरित सामंती व्यवस्था की ओर आकर्षित करना चाहता हूं।”
शुक्ला ने आरोप लगाया कि कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल को ड्यूटी सौंपने के बदले में प्रत्येक को 2,000 रुपये का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा। उनके अनुसार, संग्रह कथित तौर पर ड्यूटी प्रभारियों द्वारा किया गया, जो कमांड की श्रृंखला के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों को शेष राशि देने से पहले एक हिस्सा अपने पास रखते हैं। यह वीडियो बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रसारित होना शुरू हुआ।
लखनऊ पुलिस आयुक्त कार्यालय ने एक बयान में कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और कांस्टेबल द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की ‘निष्पक्ष और विस्तृत जांच’ करने के लिए एक समिति गठित की गई है।
बयान में कहा गया है कि रिजर्व पुलिस लाइन, लखनऊ में गार्डों की तैनाती और ड्यूटी राजपत्रित अधिकारियों की नियमित निगरानी में निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार सख्ती से की गई थी। इसमें कहा गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर समय-समय पर ड्यूटी प्रभारियों में बदलाव भी किए जाते रहे हैं।
आयुक्त कार्यालय ने कहा कि जांच अपर पुलिस उपायुक्त (लाइन), लखनऊ द्वारा की जा रही है। इसमें कहा गया कि शिकायतकर्ता कांस्टेबल वर्तमान में 20 दिनों की अर्जित छुट्टी पर था।
बयान में कहा गया है, ‘जांच पूरी होने और तथ्यों और सबूतों की जांच के बाद नियमों के अनुसार आवश्यक कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।’
भाषा चंदन जफर आशीष
आशीष

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