अदालत ने पार्कों के व्यावसायिक उपयोग पर सवाल उठाए, सरकार को नीति पर पुनर्विचार का निर्देश दिया

अदालत ने पार्कों के व्यावसायिक उपयोग पर सवाल उठाए, सरकार को नीति पर पुनर्विचार का निर्देश दिया

अदालत ने पार्कों के व्यावसायिक उपयोग पर सवाल उठाए, सरकार को नीति पर पुनर्विचार का निर्देश दिया
Modified Date: May 11, 2026 / 11:30 pm IST
Published Date: May 11, 2026 11:30 pm IST

लखनऊ, 11 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में पार्कों, खेल के मैदानों और खुले स्थानों के व्यावसायिक उपयोग पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को मौजूदा नीति पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि पार्कों में होने वाले व्यावसायिक आयोजन पर्यावरण, पक्षियों और आसपास के निवासियों को प्रभावित करते हैं।

पीठ ने जनेश्वर मिश्रा पार्क सहित पार्कों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश पार्क, खेल मैदान और खुली जगह (संरक्षण एवं विनियमन) अधिनियम, 1975 की धारा छह के तहत सूचीबद्ध स्थलों का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही हो सकता है तथा किसी अन्य गतिविधि के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।

पीठ ने मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में पार्कों, खेल मैदानों और खुली जगहों का सर्वेक्षण कराने तथा उन्हें उत्तर प्रदेश पार्क, खेल मैदान और खुली जगह संरक्षण एवं विनियमन अधिनियम-1975 के तहत तैयार की जाने वाली सरकारी सूची में शामिल करने का भी निर्देश दिया है।

न्यायलाय ने इन स्थलों का पूरा विवरण भी पेश करने को कहा है।

ध्वनि प्रदूषण पर कड़ा रुख अपनाते हुए अदालत ने राज्य सरकार, पुलिस, नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों को रात 10 बजे के बाद तेज संगीत और तय सीमा से अधिक शोर पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

पीठ ने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों की सुविधा को देखते हुए ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण जरूरी है।

भाषा सं आनन्द खारी

खारी


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