गाजीपुर मामला : माहौल खराब होने की आशंका के मद्देनजर 30 अप्रैल तक निषेधाज्ञा लागू
गाजीपुर मामला : माहौल खराब होने की आशंका के मद्देनजर 30 अप्रैल तक निषेधाज्ञा लागू
लखनऊ/गाजीपुर (उप्र), 26 अप्रैल (भाषा) गाजीपुर जिला प्रशासन ने करंडा विकास खंड के एक गांव के नजदीक गंगा नदी में एक किशोरी का शव मिलने के बाद बनी परिस्थितियों का संज्ञान लेते हुए पूरे जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 (असुविधा या संभावित खतरे के तत्काल मामलों में आदेश जारी करने की शक्ति) लागू कर दी है।
राज्य सरकार द्वारा लखनऊ में जारी एक बयान के मुताबिक 15 अप्रैल को गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र के एक गांव की 17 वर्षीय लड़की की मौत हो गयी थी। विपक्ष और कुछ अन्य लोग इस मामले को सनसनीखेज बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
बयान के अनुसार इससे जिले का माहौल खराब होने की बढ़ती आशंका को देखते हुए गाजीपुर के जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने आगामी 30 अप्रैल तक पूरे जिले में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। बयान के मुताबिक इस प्रावधान के तहत, किसी भी राजनीतिक दल या समूह को जिले के भीतर कहीं भी एकत्र होने की अनुमति नहीं है।
बयान के अनुसार इस घटना को लेकर किसी तरह का जुलूस निकालने, किसी भी प्रकार का प्रदर्शन करने, कैंडल मार्च निकालने या नारे लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा, घटना को देखते हुए और विशेष रूप से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कोई भी व्यक्ति या प्रतिनिधिमंडल संवेदना व्यक्त करने के लिए पीड़िता के गांव नहीं जाएगा।
गाजीपुर पुलिस के अनुसार कुछ शरारती तत्वों और विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों द्वारा इस घटना के संबंध में भ्रामक सूचनाएं और अफवाहें फैलाई जा रही हैं।
बयान में कहा गया है, ‘‘बीएनएसएस की धारा 163 इसलिए लागू की गई है क्योंकि ऐसी भ्रामक जानकारी से आम जनता के बीच आक्रोश, भय और असंतोष फैलने की आशंका है। इस आदेश का उल्लंघन करते पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 (लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा) के तहत दंडित किया जाएगा।”
इस बीच, प्रदेश के पंचायती राज, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ और हज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने रविवार को आजमगढ़ जिले में इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि इस घटना के जरिए समाजवादी पार्टी (सपा)का मकसद गाजीपुर और पूरे राज्य का माहौल खराब करना है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा प्रतिनिधिमंडल का 29 अप्रैल को पीड़िता के गांव जाकर उसके परिवार से मिलने का कार्यक्रम है। उसी दिन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उत्तर प्रदेश के हरदोई का दौरा करने और गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने का कार्यक्रम है।
मालूम हो कि गत 15 अप्रैल को गाजीपुर जिले के करंडा इलाके में एक किशोरी का शव मिला था। उसके परिवार ने बेटी के यौन उत्पीड़न और हत्या का आरोप लगाया है। यह विवाद 22 अप्रैल को तब और बढ़ गया जब पीड़ित परिवार से मिलने गए समाजवादी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल पर गांव में पथराव किया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल हो गए। पुलिस ने इस हमले के सिलसिले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।
इससे पहले, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि गांव का प्रधान और दबंग ताकतों द्वारा संरक्षित अन्य लोग इस हमले के पीछे है। उन्होंने इसे पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) पर हमला करार दिया था।
भाषा सं. सलीम धीरज
धीरज

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