(अरुणव सिन्हा)
लखनऊ/कोलकाता, 22 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक रेस्तरां में कबाब बनाने वाले शफीकुल और स्थानीय पुजारी तारक नाथ भट्टाचार्य , पश्चिम बंगाल में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में अपने-अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए गृह राज्य के लिए रवाना हो गए। इनके अलावा कई अन्य लोग भी मतदान के पूर्वी राज्य रवाना हुए हैं।
इस चुनाव में घुसपैठिये, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के अलावा संभवत: यह पहला मौका है जब ‘शाकाहारी बनाम मांसाहारी’ का मुद्दा जोर पकड़ चुका है।
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस जहां एक ओर यह आरोप लगा रही है कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आती है, तो मछली, मांस और अंडे खाने पर प्रतिबंध लगा देगी। पश्चिम बंगाल का मुख्य भोजन मछली और भात (चावल) है।
वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के इस आरोप को खारिज करने के लिए पार्टी के कुछ नेताओं से सार्वजनिक रूप से मछली और मांस का सेवन करवाया है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को इस बहस को और हवा देते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘‘मछली खाना चाहते हैं, तो मैं खुद उनके लिए मछली पकाऊंगी।’’
‘‘माछ भात-ए बंगाली’’ (मछली-भात ही बंगाली की पहचान है) की कहावत दोहराते हुए भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि बंगाल के घरों में मछली और चावल भोजन का मुख्य हिस्सा हैं।
लखनऊ के हरि सभा मंदिर में पुजारी के तौर पर काम करने वाले भट्टाचार्य पश्चिम मेदिनीपुर जिले के डेबरा विधानसभा क्षेत्र में मतदान करने की तैयारी में हैं, जहां बृहस्पतिवार को पहले चरण में मतदान होगा।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर की संभवाना जताते हुए भट्टाचार्य ने अपने गृह राज्य में चल रही ‘शाकाहारी बनाम मांसाहारी’ की बहस पर हैरानी जताई।
उन्होंने याद दिलाया कि साल 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले भी भाजपा को पश्चिम बंगाल में ‘बाहरी’ पार्टी के तौर पर पेश किया गया था, यानी एक ऐसी पार्टी, जो बंगाल की राजनीति और संस्कृति को नहीं समझती।
भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘उस समय यह बात केवल इक्का-दुक्का बयानों तक ही सीमित थी, लेकिन इस बार हमने देखा है कि नेता हाथ में मछली लेकर घूम रहे हैं और सबके सामने मांसाहारी भोजन कर रहे हैं जो कि बहुत ही अजीब बात है।’’
डेबरा सीट पर भाजपा के राजीव बनर्जी का मुकाबला तृणमूल कांग्रेस के सुभाषिस ओम से है।
लखनऊ में एक मांसाहारी रेस्तरां में खानसामा का काम करने वाले शफीकुल मालदा जिले की चंचल विधानसभा सीट के मतदाता हैं और वह भी खाने को लेकर चल रही इस बहस से हैरान हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘लखनऊ और उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में कई मांसाहारी रेस्तरां में पश्चिम बंगाल के लोग खानसामा या सहायक का काम करते हैं। उनमें से ज्यादातर लोग मतदान करने के लिये अपने गृह राज्य लौट गए हैं।’’
शफीकुल ने माना कि उन्हें ‘खानपान को लेकर हो रही बहस’ ज्यादा समझ नहीं आती, लेकिन उन्हें लगता है कि ऐसे कड़े मुकाबले वाले चुनाव में खाने-पीने की आदतों जैसे जज्बाती मुद्दे ‘अंतिम समय तक अपना रुख तय नहीं’’ करने वाले मतदाताओं पर असर डाल सकते हैं।
शफीकुल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया ‘‘मैं भी ज्यादातर बंगालियों की तरह मछली और मांस खाता हूं, लेकिन पहले यह कभी चुनाव का मुद्दा नहीं बना था जैसा कि अब बन गया है। इसकी कोई न कोई वजह जरूर होगी।’’
शफीकुल की विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस के प्रसून बनर्जी का मुकाबला भाजपा के रतन दास से है।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों के मुकाबले इस बार माहौल काफी गर्म है। खाने को लेकर बहस चल ही रही है, ठीक वैसे ही जैसे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर बहस हुई थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बंगाल में एसआईआर की वजह से मेरे परिवार वालों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। उत्तर प्रदेश में भी मतदाता सूची को अद्यतन करने का काम हुआ था लेकिन बंगाल के उलट वहां यह इतना बड़ा मुद्दा नहीं बना था।’’
शफीकुल ने यह भी बताया कि बंगाल के उनके कई दोस्त जो उत्तर प्रदेश में काम करते हैं, वे भी वोट डालने के लिए अपने राज्य लौट आए हैं।
लखनऊ के रबींद्रपल्ली में रहने वाले पुजारी सुब्रतो चक्रवर्ती का नाम बीरभूम जिले की नानूर विधानसभा सीट की मतदाता सूची में दर्ज है।
चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘मैं मतदान करने के लिए अपने घर आया हूं। मेरा भाई सुप्रियो और उसकी पत्नी टुली भी मतदान करने के लिए निर्वाचन क्षेत्र में पहुंच रहे हैं।’’
लखनऊ के लालबाग इलाके में एक रेस्तरां में काम करने वाले नजरुल करीम ने दावा किया कि मालदा जिले के करीब 50 लोग इस शहर में काम करते हैं और वे सभी मतदान करने के लिए बंगाल पहुंच चुके हैं।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यों वाली विधानसभा के चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे जबकि नतीजे चार मई को आएंगे। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बृहस्पतिवार को होने वाले पहले चरण के मतदान के लिए करीब 3.60 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं।
भाषा अरुणव सलीम धीरज
धीरज