एसआईआर: मसौदा सूची से 2.89 करोड़ नाम कटने को लेकर कांग्रेस व सपा ने उठाए सवाल, सीईओ ने दिया जवाब

एसआईआर: मसौदा सूची से 2.89 करोड़ नाम कटने को लेकर कांग्रेस व सपा ने उठाए सवाल, सीईओ ने दिया जवाब

एसआईआर: मसौदा सूची से 2.89 करोड़ नाम कटने को लेकर कांग्रेस व सपा ने उठाए सवाल, सीईओ ने दिया जवाब
Modified Date: January 7, 2026 / 11:31 pm IST
Published Date: January 7, 2026 11:31 pm IST

लखनऊ, सात जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मंगलवार को जारी मसौदा मतदाता सूची में दो करोड़ 89 लाख नाम हटाये जाने को लेकर सवाल उठाते हुए अनियमितताओं और गड़बड़ियों के आरोप लगाये हैं।

हालांकि प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इस आरोप को खारिज करते हुए बुधवार को सोशल मीडिया पर विपक्ष के दावों का जवाब दिया।

कांग्रेस कार्य समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल ने गाजियाबाद की मसौदा मतदाता सूची से अपना नाम काटे जाने का मुद्दा सोशल मीडिया के जरिये उठाया।

 ⁠

उन्होंने मंगलवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि गाजियाबाद के साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र से नोएडा विधानसभा इलाके में जा बसने के बाद उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है।

इसे ‘जनहित का मुद्दा’ बताते हुए, सप्पल ने दावा किया कि यह समस्या केवल उन्हीं तक सीमित नहीं है और उत्तर प्रदेश के मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को प्रभावित करती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने पते से नाम तो हटा दिए गए, लेकिन नए पते पर उन्हें जोड़ा नहीं गया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों स्थानों से मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।

कांग्रेस नेता ने कहा, ”अब फार्म-6 भरकर नये मतदाता के रूप में फिर से जुड़ सकते हैं लेकिन ऐसा करते ही पुरानी मतदाता सूची से रिकॉर्ड अलग हो जाएगा। मेरे अपने मामले में पिछले 35 साल का रिकॉर्ड मिट जाएगा। रिकॉर्ड क्यों जरूरी है? इस बारे के एसआईआर में निर्वाचन आयोग ने उन्हें स्वत: असली वोटर और नागरिक माना है जिनका नाम वर्ष 2003 की सूची में था।”

उन्होंने सवाल उठाया कि इस प्रक्रिया को एपिक नंबर से क्यों नहीं जोड़ा गया, जैसा कि पहले फॉर्म-आठ के जरिए संभव था। पहले भी फॉर्म-आठ भरकर कोई भी मतदाता अपना वोट नये पते पर स्थानांतरित कर सकता था। तो फिर ऐसा न करके सीधे-सीधे नाम डिलीट करने का क्या औचित्य है?

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) रिणवा ने बुधवार को कांग्रेस नेता के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि यह दावा करना गलत है कि मतदाता का नाम दोनों जगहों से हटा दिया गया है।

रिणवा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि चूंकि सप्पल का नाम नए पते पर मतदाता सूची में नहीं जोड़ा गया था, इसलिए यह कहना गलत है कि दोनों जगहों से नाम हटा दिया गया है।

उन्होंने कहा कि जो मतदाता अपना घर बदल चुके हैं, वे फॉर्म-छह भरकर नए पते पर नाम को सूची में शामिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं और इसी तरह की स्थिति वाले अन्य लोग भी यही प्रक्रिया अपना सकते हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जोर देकर कहा कि एसआईआर का सिर्फ शुरुआती चरण पूरा हुआ है और अंतिम नतीजा अंतिम मतदाता सूची में दिखेगा।

उन्होंने कहा, ”इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि नाम मसौदा मतदाता सूची में है या नहीं। अंतर इससे पड़ता है कि नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल है या नहीं।”

हालांकि सप्पल ने रिणवा के स्पष्टीकरण का जवाब देते हुए एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, ”मैं जवाब से संतुष्ट नहीं हूं। मुद्दा यह नहीं है कि हमारे नाम क्यों हटाये गये बल्कि यह है कि उन्हें उस जगह क्यों नहीं जोड़ा गया जहां हम शिफ्ट हुए थे। हमने तो संबंधित दस्तावेज भी दिये थे।”

इस बीच, प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के मीडिया प्रकोष्ठ ने मसौदा मतदाता सूची पर सवाल उठाते हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने में अनियमितताओं का आरोप लगाया।

सपा मीडिया प्रकोष्ठ ने एसआईआर के बाद मतदाता सूची से चार करोड़ नाम काटे जाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाल के एक बयान का जिक्र करते हुए दावा किया कि मुख्यमंत्री के यह कहने के बाद लगभग एक करोड़ नाम ‘जल्दबाजी में’ जोड़े गये। इसने सवाल किया कि क्या यह प्रक्रिया में पहले या बाद में हुई बेईमानी का संकेत नहीं देते हैं?

प्रकोष्ठ ने ‘एक्स’ पर कहा, ”निर्वाचन आयोग के लोग ये जान लें कि न्यायालय से कोई नहीं बच पायेगा, क्योंकि जब मामला न्यायालय जाएगा तो जवाब देना भारी पड़ जाएगा।”

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इन आरोपों का जवाब देते हुए ‘एक्स’ पर कहा, ”भारत निर्वाचन आयोग पहले भी सक्रिय था, आज भी सक्रिय है और आगे भी सक्रिय रहेगा। नवम्बर माह के दूसरे सप्ताह में राजनैतिक दलों के साथ हुई राज्य स्तरीय बैठक में समाजवादी पार्टी तथा अन्य दलों ने दो सप्ताह की अवधि बढ़ाने के लिये भारत निर्वाचन आयोग से अनुरोध करने की मांग सीईओ से की थी।”

उन्होंने कहा कि 12 नवंबर को विभिन्न मीडिया चैनल को दिये गये साक्षात्कार में सीईओ उप्र द्वारा बताया गया था कि उत्तर प्रदेश में गणना चरण के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय इसलिये लिया जा रहा है क्योंकि 2.97 करोड़ से अधिक नाम मसौदा मतदाता सूची में से निकल रहे हैं।

सीईओ ने कहा कि इस 15 दिन के अतिरिक्त समय में राजनैतिक दलों के बूथ स्तरीय एजेंटों को ऐसे मतदाताओं की सूचियां दे दी गई थीं जिनका नाम कट रहा था।

रिणवा ने कहा, ”इस अवधि में आठ-नौ लाख लोगों को मसौदा मतदाता सूची में और शामिल किया गया और इस प्रकार जब गणना चरण का कार्य 26 दिसंबर को पूरा हुआ तो 27 अक्टूबर 2025 की मतदाता सूची के मुक़ाबले छह जनवरी 2026 की मसौदा मतदाता सूची में 2.8876 करोड़ नाम ही कम हुए। न तो बेईमानी पहले हो रही थी और न ही अब हो रही है।”

यह घटनाक्रम मंगलवार को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के एक दिन बाद आया है। आयोग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में मृत्यु, विस्थापन और दूसरी जगह नामांकन जैसे कारणों से लगभग दो करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची हटा दिये गये हैं।

आयोग के मुताबिक मसौदा मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया छह फरवरी तक जारी रहेगी। अंतिम मतदाता सूची छह मार्च को प्रकाशित की जाएगी।

भाषा किशोर सलीम नोमान

नोमान


लेखक के बारे में