मेरठ जेल में गूंज रहे प्यार, जुदाई और बेवफाई के नगमे, ‘रेडियो परवाज’ बना बंदियों का अपना साथी
मेरठ जेल में गूंज रहे प्यार, जुदाई और बेवफाई के नगमे, ‘रेडियो परवाज’ बना बंदियों का अपना साथी
मेरठ (उप्र), 23 अगस्त (भाषा) मेरठ जिला जेल की ऊंची दीवारों और लोहे की सलाखों के बीच कैद जिंदगी में जब रेडियो पर कोई पुराना फिल्मी गीत गूंजता है तो किसी को बीता प्यार, किसी को अपनों से बिछड़ने का दर्द और किसी को जिंदगी के उतार-चढ़ाव याद आ जाते हैं। जेल में करीब तीन महीने पहले शुरू हुआ ‘रेडियो परवाज’ इन दिनों बंदियों की इन्हीं भावनाओं का साथी बना हुआ है जहां सबसे ज्यादा फरमाइश प्यार, जुदाई और बेवफाई से जुड़े पुराने फिल्मी गीतों की आ रही हैं।
इसी साल आठ मई को शुरू हुए ‘रेडियो परवाज’ पर रोजाना बंदियों की पसंद के गीत बजाए जाते हैं।
मेरठ के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि जेल प्रशासन ने रेडियो स्टेशन के लिए जगह उपलब्ध कराई, जबकि ‘इंडिया विजन फाउंडेशन’ ने रेडियो का पूरा तंत्र तैयार किया है।
जेल प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, बंदी एक दिन पहले पर्ची के जरिए अपनी पसंद के गीत की फरमाइश करते हैं और अगले दिन वह गीत रेडियो पर सुनाया जाता है। फरमाइश के दौरान बंदी का नाम नहीं लिया जाता, बल्कि केवल उसकी बैरक संख्या बताई जाती है।
सबसे अधिक मांग 1970, 1980 और 1990 के दशक के फिल्मी गीतों की है। पुरुष बंदी प्यार, जुदाई और बेवफाई के गीतों के अलावा भक्ति और जिंदगी की परिस्थितियों से जुड़े पुराने गीत भी सुनना पसंद करते हैं।
सूत्रों ने बताया कि महिला बंदियों की फरमाइश में प्यार और दर्द भरे गीतों के साथ मां, बच्चों और परिवार से जुड़े गीतों की मांग अधिक रहती है। जेल में करीब 1,900 पुरुष और 63 महिला बंदी हैं।
जेल अधीक्षक शर्मा ने कहा कि रेडियो सेवा शुरू होने के बाद बंदियों के व्यवहार में खास बदलाव देखने को मिल रहा है और हर दिन अलग-अलग गीतों की फरमाइशें आती हैं।
उन्होंने कहा कि संगीत और सकारात्मक माहौल बंदियों का मानसिक तनाव कम करने के साथ उनके सुधार और पुनर्वास में भी मददगार हो सकता है।
रेडियो स्टेशन में कंप्यूटर, मिक्सर, आधुनिक स्पीकर और ‘सारेगामा कारवां’ समेत कई उपकरण लगाए गए हैं। जेल की सभी बैरकों में स्पीकर लगाए गए हैं। रेडियो का प्रसारण सुबह और शाम करीब दो-दो घंटे होता है।
जेल अधीक्षक ने बताया कि रेडियो जॉकी (आरजे) की भूमिका भी एक बंदी ही संभाल रहा है जिसे ‘इंडिया विजन फाउंडेशन’ ने इसके लिए प्रशिक्षण दिया है। इच्छुक बंदियों को स्टूडियो में जाकर अपनी आवाज में गीत गाने का अवसर भी मिलता है।
‘इंडिया विजन फाउंडेशन’ की निदेशक मोनिका धवन और प्रिजन प्रोग्राम हेड रवि कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, उत्तर प्रदेश की जेलों में ‘रेडियो परवाज’ के 11 केंद्र संचालित किए जा रहे हैं जिनमें आगरा जिला जेल, आगरा केंद्रीय जेल, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, वाराणसी केंद्रीय जेल, आजमगढ़, मेरठ, सहारनपुर और लखनऊ की जिला जेल शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला कारागार की बैरक संख्या 12 में मुस्कान रस्तोगी समेत पांच महिला बंदी भी निरुद्ध हैं जिन पर अपने पतियों की हत्या के आरोप हैं।
उन्होंने बताया कि मुस्कान के अलावा दामिनी पंवार, रविता कश्यप, कोमल और अंजलि कुमारी के मामले भी प्रेम प्रसंग और पति की हत्या के आरोपों से जुड़े हैं।
भाषा सं सलीम रंजन खारी
खारी

Facebook


