सड़क निर्माण के दौरान ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के शहीदों की प्रतिमाएं ढहाईं : प्राथमिकी दर्ज
सड़क निर्माण के दौरान ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के शहीदों की प्रतिमाएं ढहाईं : प्राथमिकी दर्ज
शाहजहांपुर (उप्र), 24 मार्च (भाषा) शाहजहांपुर में सड़क निर्माण कार्य के दौरान कथित तौर पर बुलडोजर से ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के शहीदों की प्रतिमाएं ध्वस्त कर दी गईं। इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद पैदा हो गया है। वहीं, मामले में कार्यदायी संस्था के खिलाफ मंगलवार को मुकदमा दर्ज किया गया।
समाजवादी पार्टी (सपा) सहित विपक्षी दलों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
नगर निगम कार्यालय के बाहर सड़क किनारे स्वतंत्रता सेनानियों राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और ठाकुर रोशन सिंह की प्रतिमाएं स्थापित थीं, जिन पर जनप्रतिनिधि नियमित रूप से माल्यार्पण करते थे।
आरोप है कि रविवार रात इन्हें गिरा दिया गया।
पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने बताया कि इस मामले में नगर निगम के मुख्य अभियंता द्वारा कार्यदायी संस्था के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196-2 (सौहार्द बिगाड़ना) और 352 (जानबूझकर अपमान करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
उन्होंने बताया कि संबंधित शहीद स्मारक का सौंदर्यीकरण किया जा रहा था और कंपनी से कहा गया था कि वह प्रतिमाओं को निर्माणाधीन मंच पर स्थानांतरित कर दे, लेकिन उसने संबंधित विभाग को बताएं बिना रविवार की रात शहीदों की प्रतिमाओं को ध्वस्त कर दिया।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें प्रतिमाओं को तोड़े जाने और उसके मलबे को कथित तौर पर कचरे में फेंकने का दृश्य देखा जा सकता है। इस वीडियो पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
नगर निगम सूत्रों के अनुसार, सड़क निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्य से जुड़े एक ठेकेदार द्वारा यह कार्रवाई की गई। प्रतिमाओं को हटाने के बाद उनके अवशेष कथित रूप से कचरा निस्तारण स्थल पर डाले गए और स्थल पर लगी पट्टिकाएं भी बुलडोजर से हटा दी गईं।
‘पीटीआई-भाषा’ ने मामले में प्रतिक्रिया के लिए नगर आयुक्त और जिलाधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की, सफलता नहीं मिली।
सपा के जिला अध्यक्ष तनवीर खान ने आरोप लगाया कि उनके नगर पालिका अध्यक्ष कार्यकाल के दौरान एक पट्टिका लगी थी और उसपर उनका नाम था जिसे हटाने के उद्देश्य से प्रतिमाएं तोड़ी गईं। उन्होंने इसे ‘शहीदों का अपमान’ करार देते हुए प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सौंदर्यीकरण कभी शहीदों के सम्मान से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक समाचार साझा करते हुए इस घटना की निंदा की और इसे “विचलित करने वाली मानसिकता” का परिचायक बताया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे।
राय ने आरोप लगाया कि “भाजपा सरकार के नगर निगम ने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और ठाकुर रोशन सिंह जैसे महान बलिदानियों की मूर्तियों पर बुलडोजर चलवा दिए। यह देश की आजादी के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीरों और 145 करोड़ भारतीयों की भावनाओं पर सीधा आघात है। योगी सरकार को तुरंत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।”
इस बीच, अशफाक उल्ला खान के एक वंशज ने भी इस घटना को निंदनीय बताते हुए इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
शहीदों की प्रतिमाओं को बुलडोजर द्वारा तोड़कर उन्हें कूड़ डालने के स्थान पर फेंकने की वीडियो वायरल होने के बाद यहां विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन करते हुए नगर निगम के अधिकारियों का पुतला फूंका।
कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष रजनीश गुप्ता ने मंगलवार को सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्ट पहुंचकर धरना दिया। इस दौरान उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि ‘‘बड़े ही अपमानजनक ढंग से देश के अमर शहीदों की प्रतिमाओं को नगर निगम प्रशासन द्वारा बुलडोजर से तोड़कर उन्हें कूड़ा घर में फेंक दिया गया है।’’
उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि प्रशासन कांग्रेस को अशफाक उल्ला खान की प्रतिमा के अवशेष सौंप दें जिससे वह उन्हें सम्मान पूर्वक जमीन में दफन सकें, साथ ही शहीद रोशन सिंह पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के अवशेषों को वह लोग गंगा नदी में प्रवाहित कर सकें।
वही, हिंदू संगठन के नेता राजेश अवस्थी ने सैकड़ो समर्थकों के प्रदर्शन किया और नगर निगम के अधिकारियों का पुतला फूंका। उन्होंने कहा कि देश के लिए कुर्बानी देने वालों के साथ प्रशासन ने जो कृत्य किया है वह निंदनीय है।
अवस्थी ने चेतावनी दी की शाम तक आरोपियों के खिलाफ अगर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो वह इससे भी बड़ा आंदोलन करेंगे।
वहीं पत्रकारों के समूह ने संगठन के अध्यक्ष पंडित आनंद शर्मा के नेतृत्व में जिलाधिकारी को ज्ञापन सोपा है और शहीदों की प्रतिमाओं को तोड़े जाने की निंदा की है।
स्वतंत्रता सेनानियों राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह को अंग्रेजों ने 19 दिसंबर, 1927 को फांसी दे दी थी। तीनों स्वत्रंता सेनानियों को तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत ने अगस्त 1925 में लखनऊ के पास काकोरी में ट्रेन से सरकारी खजाने की लूट का दोषी करार दिया था।
भाषा सं सलीम धीरज
धीरज

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