पश्चिम बंगाल में हार के बाद घबरा गई तृणमूल कांग्रेस : शिवराज

पश्चिम बंगाल में हार के बाद घबरा गई तृणमूल कांग्रेस : शिवराज

पश्चिम बंगाल में हार के बाद घबरा गई तृणमूल कांग्रेस : शिवराज
Modified Date: May 7, 2026 / 02:17 pm IST
Published Date: May 7, 2026 2:17 pm IST

लखनऊ, सात मई (भाषा) केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक की हत्या की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ‘घबरा’ गई है।

केंद्रीय मंत्री ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा के बारे में पूछे गए एक सवाल पर तृणमूल कांग्रेस पर हिंसक तरीकों का सहारा लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘तृणमूल और ममता बनर्जी अपनी करारी हार के बाद घबरा गई हैं। लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है लेकिन तृणमूल ने हिंसा का सहारा लिया है।’

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक को इस तरह गोलियों से भून दिया गया। इस घटना के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसी घटनाएं लोकतंत्र में न सिर्फ दुखद है बल्कि शर्मनाक भी हैं। ‘

उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा का उद्देश्य एक हिंसा-मुक्त, भय-मुक्त और विकसित बंगाल बनाना है।

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल आतंकवादियों द्वारा 26 पर्यटकों की हत्या के बाद भारतीय सेना की तरफ से पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का एक साल पूरा होने से जुड़े एक अन्य सवाल के जवाब में चौहान ने कहा कि सरकार जो वादा करती है, उसे पूरा करती है।

उन्होंने कहा, ‘हम जो कहते हैं, वो करते हैं। जिसने पहलगाम में वह भयानक अपराध किया था वह अब इस दुनिया में नहीं है।’

चौहान ने यह बात आतंकवादी हमले के बाद चलाए गए सुरक्षा अभियानों के संदर्भ में कही।

उन्होंने दावा किया, ‘आतंकवाद खात्मे की ओर बढ़ रहा है, नक्सलवाद खात्मे की ओर बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सुरक्षित, भय-मुक्त और विकसित बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।’

भाषा सलीम मनीषा

मनीषा


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