उपचुनाव में ‘तुर्क’ की हार से साबित हुआ कि अब ‘बाबर का राज’ नहीं चलेगा : योगी
उपचुनाव में ‘तुर्क' की हार से साबित हुआ कि अब ‘बाबर का राज’ नहीं चलेगा : योगी
मुरादाबाद, 29 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवंबर 2024 में मुरादाबाद के मुस्लिम बहुल कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार के हाथों समाजवादी पार्टी (सपा) के ‘तुर्क’ प्रत्याशी को पराजित करने पर लोगों को धन्यवाद दिया और कहा कि इससे साबित हो चुका है कि अब ‘बाबर का राज’ नहीं चलेगा।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को 365 करोड़ रुपये से अधिक की 63 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के अवसर पर अपने सम्बोधन में कुंदरकी विधानसभा उपचुनाव का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘आपने कुंदरकी उपचुनाव देखा है। मैं मुरादाबाद जिले के निवासियों और विशेष रूप से कुंदरकी के लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने तुर्क को हराया और साबित कर दिया कि बाबर का राज अब नहीं चलेगा। अब केवल राम राज्य ही चलेगा।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की सोच एक ‘बाबरी’ मानसिकता है और यह विनाशकारी है।
मुख्यमंत्री द्वारा ‘तुर्क’ का ज़िक्र संभल में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा है। नवंबर 2024 में इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और 20 से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे।
इस घटना ने तुर्क और पठान समुदायों के बीच कथित दुश्मनी को लेकर बहस छेड़ दी थी । राजनीतिक एवं प्रशासनिक हस्तियों ने इस अशांति के कारणों पर अपनी राय रखी थी।
भाजपा ने दावा किया था कि हिंसा ‘सुनियोजित’ थी और यह दो गुटों के बीच दुश्मनी का नतीजा थी। पार्टी के अनुसार इन गुटों का नेतृत्व संभल के सांसद ज़िया-उर-रहमान बर्क (जो तुर्क समुदाय के नेता हैं) और सोहेल इक़बाल (जो विधायक नवाब इक़बाल महमूद के बेटे हैं और पठान समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं) कर रहे थे।
कुंदरकी एक मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र है और इस सीट के लिये नवंबर 2024 में उपचुनाव में भाजपा के रामवीर सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा के मोहम्मद रिजवान को एक लाख 44 हजार 791 मतों के अंतर से हराया था।
यह सीट इस सीट से सपा के विधायक जिया उर्रहमान के संभल से सांसद चुने जाने के चलते उनके विधानसभा से त्यागपत्र देने के कारण खाली हुई थी।
योगी ने संभल की जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘‘इस बाबरी मानसिकता ने संभल में हरिहर मंदिर के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। संभल को इस त्रासदी का सामना करना पड़ा। यदि उस युग का समाज सतर्क होता तो कोई भी हरिहर मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा सकता था।’’
उन्होंने कहा कि कोई भी इसके 67 पवित्र तीर्थ स्थलों को नहीं छू सकता था या इसके 19 कूपों पर जबरन कब्जा नहीं कर सकता था और न ही कोई स्थानीय लोगों को जबरन धर्म परिवर्तन के माध्यम से आक्रांताओं का अनुसरण करने के लिए मजबूर कर सकता था।
उन्होंने सपा के साथ-साथ कांग्रेस को भी ‘बाबरी मानसिकता’ वाली पार्टी बताया और कहा, ‘‘कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की विभाजनकारी नीतियां बाबरी मानसिकता का परिणाम हैं।’’
भाषा अरुणव सलीम जितेंद्र राजकुमार
राजकुमार

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