उप्र कांग्रेस अध्यक्ष ने पुलिस की पिटाई से जाान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजन से फोन पर बात की
उप्र कांग्रेस अध्यक्ष ने पुलिस की पिटाई से जाान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजन से फोन पर बात की
बलिया (उप्र), 14 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने बलिया जिले के रेवती क्षेत्र स्थित गायघाट गांव में कथित तौर पर पुलिस की पिटाई से जान गंवाने वाले, अनुसूचित जनजाति के एक व्यक्ति के परिजन से फोन पर बात की और न्याय की लड़ाई लड़ने का भरोसा दिलाया।
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाठक ने सोमवार को मृतक कामजी गोंड के परिजन से मुलाकात की और उसके बेटे विशाल से मोबाइल फोन पर पार्टी के प्रान्तीय अध्यक्ष अजय राय से बात करायी।
पाठक ने मंगलवार को बताया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने पुलिस हिरासत में मृत गोंड के परिवार को न्याय दिलाने के लिये लड़ाई लड़ने का भरोसा दिलाया और कहा कि अगर पीड़ित परिवार के साथ इंसाफ नहीं किया गया तो पार्टी कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट गांव के निवासी अनुसूचित जनजाति के कामजी गोंड नामक व्यक्ति की गत 10 जुलाई की रात को वाराणसी स्थित ट्रामा सेंटर में उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मृतक के बेटे विशाल ने इस सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि पुलिस उप निरीक्षक सचिन सरोज और आरक्षी अंकित सिंह आठ जुलाई की दोपहर उसके घर आए और उसके पिता कामजी गोंड (42) को लेकर थाने गये।
सूत्रों के अनुसार, विशाल का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे थाने में बुलाने के लिए ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह के दबाव में उसके पिता की पिटाई की, जिसके बाद ग्राम प्रधान और उसका साथी मनीष यादव आठ जुलाई की शाम को गोंड को अपने साथ एक ईंट-भट्ठे पर ले गए, जहां उसकी पिटाई कर उसे पास के एक बगीचे में फेंक दिया।
सूत्रों के अनुसार मृतक के बेटे विशाल ने दर्ज प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया है कि उसके पिता के शव का वाराणसी में पोस्टमार्टम हुआ है, लेकिन वह उसकी रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि परिजनों ने इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के 72 घंटे बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी न होने पर नाराजगी जतायी है।
पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने ‘पीटीआई—भाषा’ को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोंड के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं मिला है, बस उसके घुटने के पास एक सप्ताह पुरानी खरोंच का निशान पाया गया है।
उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में मौत का कारण अनिश्चित है, लिहाजा उसका विसरा सुरक्षित रखा गया है।
मृतक के बेटे विशाल का आरोप है कि पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलवा दी है। उसने मुकदमा दर्ज होने के 72 घंटे बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी न किये जाने को लेकर पुलिस की जांच और कार्रवाई पर अविश्वास जताया है।
विशाल ने आरोप लगाया कि आरोपी ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा है इसलिए पुलिस उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही है।
विशाल ने मांग की कि उसके पिता ही परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे लिहाजा उसके परिवार को एक करोड़ रुपए की सरकारी सहायता और उसकी मां को सरकारी पेंशन दी जाए, साथ ही मुकदमा में एससी / एसटी कानून की धारा भी लगायी जाये।
मुकदमे की विवेचना कर रही पुलिस उपाधीक्षक मंजरी राव ने मंगलवार को बताया कि वह साक्ष्य संकलन कर रही है और पुलिस विवेचना में मिले साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करेगी।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि कामजी गोंड की मौत के मामले में मृतक के बेटे विशाल गोंड की तहरीर पर दारोगा सचिन सरोज, आरक्षी अंकित सिंह, ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह, सूरज कन्नौजिया, उसके एक रिश्तेदार और मनीष यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की हत्या के आरोप और अन्य संबंधित धाराओं में पिछले रविवार को मुकदमा दर्ज किया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस उप महानिरीक्षक सुनील सिंह के निर्देश पर मुकदमे की विवेचना मिर्जापुर से हाल ही में स्थानांतरित होकर आई पुलिस उपाधीक्षक मंजरी राव को सौंपी गई है।
उन्होंने बताया कि इस मामले में फिलहाल आरोपी दारोगा सचिन सरोज तथा आरक्षी अंकित सिंह को रविवार को ही निलंबित किया जा चुका है और थाना प्रभारी राज केशर सिंह को पुलिस लाइन में स्थानांतरित किया गया है।
इस मामले में न्याय और अन्य चार मांगों को लेकर अखिल भारत गोंड महासभा ने सोमवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया।
भाषा सं. सलीम नरेश मनीषा
मनीषा

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