उप्र: विशेष सत्र में सड़क से सदन तक दलों का प्रदर्शन, महिला आरक्षण पर मचा सियासी संग्राम

उप्र: विशेष सत्र में सड़क से सदन तक दलों का प्रदर्शन, महिला आरक्षण पर मचा सियासी संग्राम

उप्र: विशेष सत्र में सड़क से सदन तक दलों का प्रदर्शन, महिला आरक्षण पर मचा सियासी संग्राम
Modified Date: April 30, 2026 / 04:20 pm IST
Published Date: April 30, 2026 4:20 pm IST

लखनऊ, 30 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश विधानमंडल के एक दिवसीय विशेष सत्र से पहले बृहस्पतिवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच महिला आरक्षण के मुद्दे पर टकराव देखने को मिला।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों ने विधान भवन परिसर से लेकर सड़कों व सदन तक सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया, वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों, विशेषकर महिला सदस्यों ने विपक्ष के खिलाफ जवाबी प्रदर्शन किया।

सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले सपा सदस्य अपनी-अपनी सीट पर हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करने लगे।

सपा विधायक नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष की अनुपस्थिति में आसन के समीप पहुंच गए और ‘महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दो’ जैसे नारे लगाने लगे।

कई तख्तियों पर संबंधित विधायकों के नाम भी अंकित थे।

सपा विधायक अतुल प्रधान एक ऐसी तख्ती लेकर आए थे, जिसमें प्रधानमंत्री को चारों ओर से घिरा हुआ दर्शाया गया था।

भाजपा की महिला विधायकों ने भी इसके जवाब में तख्तियां लेकर विरोध जताया।

भाजपा महिला विधायकों की तख्तियों पर ‘इंडी गठबंधन शर्म करो’, ‘साड्डा हक एथे रख’ और ‘हारी थीं, न हारेंगी’ जैसे नारे लिखे थे।

सपा की महिला सदस्यों को आसन के समीप देखकर भाजपा की महिला सदस्य भी अपनी सीट से उठकर आगे आ गईं, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी नारेबाजी हुई।

इसी दौरान नेता सदन एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सदन में पहुंचने के बाद स्थिति कुछ हद तक सामान्य हुई तथा सदस्य अपनी-अपनी सीट पर लौट गए। इससे पहले सपा विधायकों ने विधान भवन परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन किया।

पार्टी ने अपने विधायकों को समूहों में विभाजित कर अलग-अलग द्वारों पर प्रदर्शन की जिम्मेदारी सौंपी थी।

द्वार संख्या-एक पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे।

बाद में सपा सदस्य विधान भवन के मुख्य द्वार के सामने सड़क पर भी उतर आए और ‘33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करो’ लिखे बैनरों के साथ विरोध जताया। सपा विधायक संग्राम सिंह यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन को अपने अनुकूल बनाने के उद्देश्य से इस कानून को लागू नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में रही है।

सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को अब तक लागू नहीं किया गया और इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने 2027 में विधानसभा चुनाव इसी प्रावधान के अनुरूप कराने की मांग की।

विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने भी कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण की पक्षधर है और भाजपा इस मुद्दे पर जनता को भ्रमित कर रही है।

सपा के अन्य विधायकों ने भी इसी प्रकार के आरोप लगाए। वहीं, कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला आरक्षण को 2029 तक टालना उचित नहीं है और इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए।

इस बीच, भाजपा की महिला विधायकों ने भी विधान भवन परिसर में प्रदर्शन किया।

सपा के प्रदर्शन के बाद भाजपा की महिला सदस्य चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के समक्ष एकत्र हुईं और ‘मातृशक्ति का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ जैसे नारों वाले बैनर लेकर विरोध जताया।

बाद में वे इन्हीं बैनरों के साथ सदन के भीतर भी पहुंचीं।

प्रदर्शन में शामिल महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि सपा और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण का विरोध किया है तथा उन्हें इसका राजनीतिक परिणाम भुगतना पड़ेगा।

भाजपा विधायक केतकी सिंह ने इसे प्रदेश की महिलाओं के आक्रोश का प्रतीक बताया।

राज्य मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम ने कहा कि केंद्र सरकार ने नारी सशक्तिकरण के उद्देश्य से यह विधेयक लाया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसमें बाधा उत्पन्न की। विधानसभा के इस एकदिवसीय विशेष सत्र में राज्य सरकार महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित न होने को लेकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने जा रही है।

सरकार का उद्देश्य 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष को महिला विरोधी के रूप में प्रस्तुत करना है जबकि विपक्ष इस कदम का कड़ा विरोध कर रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि महिला आरक्षण का मुद्दा अब केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया बल्कि यह प्रदेश की राजनीति में प्रमुख चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।

भाषा सलीम आनन्द जितेंद्र

जितेंद्र


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