महिलाओं के आरक्षण के अधिकार को लागू कराने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे: प्रधानमंत्री मोदी

महिलाओं के आरक्षण के अधिकार को लागू कराने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे: प्रधानमंत्री मोदी

महिलाओं के आरक्षण के अधिकार को लागू कराने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे: प्रधानमंत्री मोदी
Modified Date: April 28, 2026 / 10:22 pm IST
Published Date: April 28, 2026 10:22 pm IST

वाराणसी (उप्र), 28 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) समेत विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को रोकने के लिए हमला किया और कहा कि वह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि महिलाओं के आरक्षण के अधिकार को लागू कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

संसद में इस विधेयक के गिरने के बाद पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को ‘जन-आक्रोश महिला सम्मेलन’ को संबोधित किया।

इस दौरान उन्होंने कहा, ”आज इस कार्यक्रम में आप सभी बहनों-बेटियों से एक महायज्ञ की शुरुआत के लिए आशीर्वाद लेने आया हूं।”

उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि ”काशी के सांसद, देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे देश हित में एक बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आप सबका आशीर्वाद चाहिए। यह बड़ा लक्ष्‍य लोकसभा विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना है।”

मोदी अपने सम्बोधन में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के संसद में पारित नहीं होने के मुद्दे को लेकर विपक्ष पर खासे हमलावर रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति ही विकसित भारत का सबसे मजबूत स्तम्भ है और आज हर क्षेत्र और हर मोर्चे पर भारत की बेटियां इतना शानदार काम कर रही हैं तो स्वाभाविक है कि नीति निर्माण और राष्ट्र के भविष्य से जुड़े फैसलों में भी बहनों और बेटियों की भूमिका और बढ़नी ही चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने नया संसद भवन बनने के बाद सबसे पहले संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून पारित करने का ही काम किया था और इसे जल्द लागू करने के लिये पिछले दिनों में संसद में संविधान संशोधन का प्रस्ताव लाया गया था लेकिन 40 साल से इस मामले को लटकाये कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक जैसी पार्टियों ने महिलाओं को एक बार फिर ‘धोखा’ दिया।

प्रधानमंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा, ”असली बात यह है कि यह सारे परिवारवादी और तुष्टीकरण में डूबे दल नारी शक्ति से डरे हुए हैं। यह परिवारवादी दल देश की उन बेटियों को विधानसभा और संसद में नहीं आने देना चाहते हैं जो कॉलेज कैंपस से लेकर पंचायतों और स्थानीय निकायों तक हर जगह अपने दम पर नेतृत्व दे रही हैं। यह जानते हैं कि अगर धरातल पर काम करने वाली बेटियां ऊपर आ गईं तो इनका नियंत्रण खत्म हो जाएगा, इनकी सत्ता पर सवाल खड़े हो जाएंगे, इसलिए ही वे संसद में हुए विरोध में सबसे आगे रहे।”

उन्होंने पश्चिम बंगाल तथा चुनाव से गुजर रहे अन्य राज्यों में हुए बम्पर मतदान को लेकर दावा करते हुए कहा, ”देश की बहने और बेटियां महिला आरक्षण का विरोध करने वाले दलों की कुटिल मंशा को पहचान गयीं और असम, केरलम, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बहनों ने रिकार्ड मतदान किया है। महिला आरक्षण विरोधी दलों को अंदाजा नहीं है कि बहनों का एक वोट महिला विरोधी इन दलों को सजा देने के लिए हुआ है।”

मोदी ने कहा कि कांग्रेस और सपा जैसे दलों की वजह से महिला आरक्षण से जुड़ा सरकार का प्रयास संसद में भले ही सफल नहीं हो पाया लेकिन वह सभी महिलाओं को फिर से भरोसा दिलाते हैं कि उनका आरक्षण का हक लागू करवाने में वह कोई कोर—कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे।

महिलाओं को विशेष महत्व देते हुए उन्‍होंने कहा कि ”हमारी काशी माता श्रृंगार गौरी, माता अन्नपूर्णा, माता विशालाक्षी, माता संकटा और मां गंगा जैसी दिव्य शक्तियों की भूमि है, ऐसे में आप सभी बहन बेटियों के इस समागम ने इस अवसर को बहुत दिव्‍य बना दिया।”

प्रधानमंत्री ने कभी महिलाओं से भोजपुरी तो कभी हिंदी में संवाद करते हुए मोदी ने कहा कि अतीत में बहनों-बेटियों को बहुत संघर्ष करना पड़ा है और काशी की बहनों ने भी कई तरह की मुश्किलें देखी हैं।

मोदी ने पूर्वांचल में बोली जाने वाली भोजपुरी में किये जाने वाले संवादों को दोहराते हुए कहा ”लोग अतीत में महिलाओं से कहते ”तू का करबू” ”तूहे का जरूरत ह”, ”ई काम तोहसे ना हो पाई।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि कई बार तो सवाल भी नहीं पूछे जाते थे, सीधे फरमान सुनाया जाता था।

मोदी ने कहा, ”जब 25 साल पहले गुजरात में मुख्यमंत्री बना था तो सबसे पहले मैंने ऐसी धारणाओं को तोड़ने का प्रयास किया था। उस दौरान बेटियों के लिए समर्पित दो बड़ी योजनाएं शुरू की गई थीं, एक थी शाला प्रवेश उत्सव, जो स्कूल में बच्चियों की दाखिले की मुहिम थी और दूसरी थी मुख्यमंत्री कन्या केलवणि निधि योजना, ताकि स्कूल की फीस देने में बच्चियों की मदद की जा सके। तब से आज तक हमारी सरकार की नीतियों में महिला कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।”

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर अपनी सरकार द्वारा महिलाओं की सुविधा के लिये शुरू की गयी विभिन्न परियोजनाओं का विस्तार से जिक्र किया और कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र में उनकी सरकार बनने के बाद देश में 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया, 30 करोड़ से अधिक महिलाओं का बैंक खाता खुला और ढाई करोड़ से ज्यादा घरों में बिजली का कनेक्शन दिया गया।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का पूरा जोर बहनों की सुविधा और सुरक्षा पर रहा है क्योंकि यही दो चीजें हैं जो सशक्तीकरण की नींव को मजबूत करती हैं।

मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो बेटियों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया था लेकिन अब भाजपा की सरकार में बेटियों के विरुद्ध गलत सोच रखने वाला अच्छी तरह से जानता है कि उसका अंजाम क्या होगा।

उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता ने भी बहनों और बेटियों को सुरक्षा का नया भरोसा दिया है क्योंकि इसके तहत महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों में फैसले तेजी से आने लगे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब महिलाओं की आर्थिक शक्ति बढ़ती है तो घर में उनकी आवाज भी उतनी ही बुलंद हो जाती है इसलिए सुविधा और सुरक्षा का विश्वास देने के साथ-साथ सरकार ने बहनों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर भी बल दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश की करीब 10 करोड़ बहने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं जिन्हें लाखों रुपये की मदद मिल रही है।

इस मौके पर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, भाजपा के राष्ट्रीय अध्‍यक्ष नितिन नवीन, प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ, प्रदेश भाजपा अध्‍यक्ष व केन्‍द्रीय वित्‍त राज्‍य मंत्री पंकज चौधरी समेत कई प्रमुख लोग उपस्थित थे।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्‍यक्ष पूनम मौर्या तथा अन्य महिलाओं ने प्रधानमंत्री को विभिन्न कलाकृतियां भेंटकर उनका स्वागत किया। इस आयोजन की विशेषता रही कि इसकी पूरी कमान महिलाओं ने संभाली। यहां तक कि सुरक्षा व्यवस्था में महिला पुलिसकर्मी तैनात की गईं।

भाषा आनन्द सलीम

संतोष

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