अदाणी प्रकरण: न्यायाधीश के प्रश्न से मुकदमा खत्म करने के निर्णय पर असर पड़ने की संभावना नहीं
अदाणी प्रकरण: न्यायाधीश के प्रश्न से मुकदमा खत्म करने के निर्णय पर असर पड़ने की संभावना नहीं
न्यूयार्क , 28 जून (भाषा) अमेरिकी अरबपति गौतम अदाणी के ख़िलाफ़ आपराधिक आरोप हटाने को मंज़ूरी देने से पहले, सरकारी वकीलों से पूर्ण स्पष्टीकण मांगने का अमेरिकी संघीय न्यायाधीश का फ़ैसला एक प्रक्रियात्मक जरूरत है और इसका मतलब यह नहीं है कि यह मामला आगे बढ़ेगा।
संघीय आपराधिक मामलों से परिचित एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिवक्ता ने यह बात कही।
वकील क्रिस मैन ने कहा, ‘‘न्यायाधीश का आदेश प्रक्रिया से जुड़ा है।’’
नियम 48(ए) के तहत, न्याय विभाग को मुकदमे को खारिज करने के लिए अदालत से इजाज़त लेनी होती है और न्यायाधीश फैसला सुनाने से पहले सवाल पूछ सकते हैं या अतिरिक्त जानकारी मांग सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह कोई असामान्य बात नहीं है।’’
वकील ने कहा कि ऐसा बहुत कम ही हुआ है कि किसी संघीय अदालत ने अभियोजक को तब आपराधिक मामला जारी रखने के लिए मजबूर किया हो, जब न्याय विभाग ने उसे ख़त्म करने का फ़ैसला कर लिया हो।
उन्होंने कहा कि न्यायाधीश के पास ‘‘बहुत कम विवेकाधिकार’ होते हैं।
ये टिप्पणियां तब आईं जब अदाणी मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने न्याय विभाग को निर्देश दिया कि वह अभियोग को खारिज करने की अपनी अर्ज़ी के लिए और ज़्यादा विस्तृत स्पष्टीकरण दे।
अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गैराफिस ने कहा था कि 18 मई को संघीय अभियोजक ने जो घोषणा की थी कि वह अब उस मामले को आगे नहीं बढ़ाएंगे, उसमें फ़ैसले की पर्याप्त व्याख्या नहीं की गई है।
इस मामले में अदाणी पर रिश्वतखोरी की कथित साज़िश से जुड़े ‘सिक्योरिटीज़ फ्रॉड’ और ‘वायर फ़्रॉड’ के आरोप हैं।
भाषा
राजकुमार नेत्रपाल
नेत्रपाल

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