संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में भारत-ओमान के समुद्री संबंधों को प्रमुखता से दर्शाया गया
संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में भारत-ओमान के समुद्री संबंधों को प्रमुखता से दर्शाया गया
(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 16 मई (भाषा) भारतीय नौसेना के पारंपरिक रूप से सिले हुए पाल वाले पोत आईएनएसवी ‘कौंडिन्य’ की पोरबंदर से मस्कट तक की पहली यात्रा को संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया, जिसमें वक्ताओं ने वैश्विक समुद्रों मार्गों पर तनाव के बीच सदियों पुरानी समुद्री परंपराओं और सहयोग पर जोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन और ओमान मिशन ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ‘प्राचीन व्यापार मार्ग: आईएनएसवी कौंडिन्य की यात्रा’ शीर्षक से एक कार्यक्रम का संयुक्त रूप से आयोजन किया।
भारतीय नौसेना के कमोडोर अमित श्रीवास्तव, पोत के कप्तान कमांडर विकास श्योराण और अभियान अधिकारी कमांडर वाई. हेमंत कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित किया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। हम प्रतिदिन एक विशेष प्रकार के समुद्री संकट पर चर्चा कर रहे हैं जो हम पर, हमारे राष्ट्रों और हमारे नागरिकों पर प्रभाव डाल रहा है, फिर भी हमारे पास शांतिपूर्ण व्यापार और वाणिज्य की सदियों पुरानी समुद्री परंपराएं हैं, ऐसे आदान-प्रदान जो सदियों से चले आ रहे हैं।’’
हरीश की टिप्पणियों से ऐसा प्रतीत होता है कि वह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यवधानों को लेकर चिंताओं की ओर इशारा कर रहे थे।
भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से निर्मित पारंपरिक रूप से सिले हुए पाल वाला पोत ‘कौंडिन्य’ 29 दिसंबर, 2025 को गुजरात के पोरबंदर से ओमान के मस्कट के लिए अपनी पहली विदेशी यात्रा पर रवाना हुआ था।
संरा में भारत के स्थायी मिशन ने कहा, ‘‘प्राचीन व्यापार मार्ग भारत और ओमान की जिम्मेदार समुद्री सभ्यताओं के रूप में दीर्घकालिक भूमिका को दर्शाते हैं।’’
भाषा शफीक पवनेश
पवनेश

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