इस्लामाबाद वार्ता: जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने ईरान से बातचीत शुरू की

इस्लामाबाद वार्ता: जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने ईरान से बातचीत शुरू की

इस्लामाबाद वार्ता: जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने ईरान से बातचीत शुरू की
Modified Date: April 12, 2026 / 12:20 am IST
Published Date: April 12, 2026 12:20 am IST

(सज्जाद हुसैन और एम जुल्करनैन)

इस्लामाबाद, 11 अप्रैल (भाषा) अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को पाकिस्तान में शीर्ष ईरानी वार्ताकारों के साथ आमने-सामने की वार्ता शुरू की।

इस वार्ता का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक स्थायी शांति समझौते पर पहुंचना है। युद्ध की वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है और बड़े पैमाने पर आर्थिक व्यवधान पैदा हुए हैं।

पाकिस्तान की मध्यस्थता से हो रही यह वार्ता 1979 में ईरान में हुई इस्लामी क्रांति के बाद दोनों पक्षों के बीच पहली प्रत्यक्ष, उच्चस्तरीय बातचीत के तौर पर देखी जा रही है।

इस्लामाबाद के सेरेना होटल में त्रिपक्षीय वार्ता से पहले, वेंस के नेतृत्व वाली अमेरिकी टीम और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ के नेतृत्व वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ अलग-अलग बैठकें कीं।

पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ द्वारा दोनों प्रतिनिधिमंडलों के साथ अलग-अलग बैठकें करने के बाद, ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत का औपचारिक दौर आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है।’

पाकिस्तान के सरकारी चैनल पीटीवी ने बताया कि ईरान और अमेरिका के अधिकारी “ऐतिहासिक शांति वार्ता” के लिए आमने-सामने बैठे। हालांकि बातचीत का स्वरूप पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

इस बीच, ईरानी सरकार ने सोशल मीडिया पर कहा कि “इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत विशेषज्ञ स्तर में प्रवेश कर गई है।

बिना ज्यादा जानकारी दिए यह भी कहा गया कि कुछ “तकनीकी विवरणों” को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

पाकिस्तानी सूत्रों ने बताया कि बातचीत का माहौल “उत्साहजनक” रहा।

खबरों के अनुसार, यदि आज रात कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता है तो बातचीत रविवार तक जारी रह सकती है।

ईरान की अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने बताया कि वार्ता सामान्य मुद्दों से आगे बढ़कर “कुछ विषयों” पर तकनीकी स्तर की चर्चा में पहुंच गई है।

एक ओर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर शामिल हैं, तो दूसरी ओर गालिबफ के नेतृत्व वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली अकबर अहमदियन और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दुलनासिर हिम्मती शामिल हैं।

दोनों प्रतिनिधिमंडल ईरान और अमेरिका द्वारा दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के चार दिन बाद शनिवार को इस्लामाबाद पहुंचे। हालांकि लेबनान पर इजराइल के बड़े हमलों ने इस युद्धविराम को कमजोर कर दिया है।

तेहरान ने कहा कि यह हमले युद्धविराम का उल्लंघन हैं, जबकि अमेरिका और इजराइल का कहना है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था।

इससे पहले नूर खान एयरबेस पर उपप्रधानमंत्री इसहाक डार, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और गृह मंत्री सैयद मोहसिन रजा नकवी ने दोनों प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान शांति वार्ता में सकारात्मक परिणाम हासिल करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान शरीफ ने उम्मीद जताई कि इस वार्ता से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति लौटेगी।

ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि अगर अमेरिकी पक्ष “अमेरिका फर्स्ट” नीति के अनुसार ईमानदारी से काम करे तो समझौता संभव है।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर “इजराइल फर्स्ट” सोच हावी रही तो कोई समझौता नहीं होगा।

आरिफ ने यह भी कहा कि अगर शांति समझौता नहीं हुआ तो दुनिया को “ज्यादा बड़ी कीमत” चुकानी पड़ेगी।

तस्नीम एजेंसी ने पहले बताया था कि जब तक ईरान की शर्तें— जैसे लेबनान पर इजराइली हमले रोकना और ईरान की संपत्तियों पर से प्रतिबंध हटाना- नहीं मानी जातीं, तब तक बातचीत शुरू नहीं होगी।

बाद में एक सूत्र के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिका, ईरान की संपत्तियों पर से प्रतिबंध हटाने के लिए सहमत हो गया है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति के उपराष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार एंड्रयू बेकर और उपराष्ट्रपति के एशियाई मामलों के विशेष सलाहकार माइकल वेंस भी शामिल हैं।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों की पूरी टीम इस्लामाबाद में मौजूद है।

इससे पहले ईरानी संसद अध्यक्ष गालिबफ ने पाकिस्तान जाते समय विमान के अंदर की एक तस्वीर साझा की, जिसमें मिनाब स्कूल पर हुए हमले में मारे गए छात्रों की तस्वीरें सीटों पर लगी थीं।

उन्होंने लिखा, “इस उड़ान में मेरे साथी — मिनाब 168 ।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि वार्ता सफल नहीं होती है तो अमेरिका, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करेगा।

पाकिस्तान रवाना होने से पहले वेंस ने कहा कि वह वार्ता को लेकर आशावादी हैं और उम्मीद करते हैं कि यह “सकारात्मक” रहेगी।

उन्होंने कहा, “अगर ईरान ईमानदारी से बातचीत के लिए तैयार है, तो हम भी खुले दिल से आगे बढ़ेंगे, लेकिन अगर वे हमें धोखा देने की कोशिश करेंगे, तो हमारी टीम उसे स्वीकार नहीं करेगी।”

इस्लामाबाद पहुंचने के बाद गालिबफ ने अमेरिका के साथ भरोसे के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी बातचीत के दौरान अमेरिका ने ईरान पर हमले किए थे।

उन्होंने कहा, “हमें अमेरिकियों पर भरोसा नहीं है।”

उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी पक्ष “वास्तविक समझौते” के लिए तैयार है, तो ईरान भी इसके लिए तैयार है।

ईरान ने वार्ता के लिए 10-सूत्री योजना पेश की है, जिसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी सेना की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण शामिल है।

पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने में अहम भूमिका निभाई। इस हफ्ते प्रधानमंत्री शरीफ की अपील के बाद ऐसा संभव हो सका।

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि अमेरिका को युद्धविराम की शर्तों का पालन करना चाहिए, जिसमें लेबनान को भी शामिल करना जरूरी है।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि लेबनान पर इजराइली हमले “स्पष्ट रूप से” युद्धविराम का उल्लंघन हैं और इससे वार्ता निरर्थक साबित हो सकती है।

वार्ता से पहले इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई और ‘रेड अलर्ट’ घोषित किया गया।

अधिकारियों के अनुसार, 10,000 से अधिक पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।

रेड ज़ोन, जहां महत्वपूर्ण इमारतें हैं, सेना और रेंजर्स की सुरक्षा में है और वहां केवल अधिकृत लोगों को ही प्रवेश की अनुमति है।

ईरान-अमेरिका वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर है, क्योंकि इसकी सफलता या विफलता का पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

भाषा तान्या जोहेब सुरेश

सुरेश


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