मोदी-मैक्रों वार्ता: भारत, फ्रांस ने व्यापार को दोगुना कर 32 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा

मोदी-मैक्रों वार्ता: भारत, फ्रांस ने व्यापार को दोगुना कर 32 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा

मोदी-मैक्रों वार्ता: भारत, फ्रांस ने व्यापार को दोगुना कर 32 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा
Modified Date: June 15, 2026 / 12:09 am IST
Published Date: June 15, 2026 12:09 am IST

(फोटो के साथ)

नीस (फ्रांस), 14 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच रविवार को बातचीत के बाद दोनों देशों ने अगले पांच वर्ष में अपने सालाना द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 16 अरब अमेरिकी डॉलर से दोगुना करने का लक्ष्य तय किया। साथ ही, अहम क्षेत्रों में संबंध बढ़ाने के लिए एक नवाचार रूपरेखा और संयुक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ढांचा पेश किया।

दोनों नेताओं के बीच हुई व्यापक वार्ता में 13 मुद्दों पर सहमति बनी, जिसमें दोनों पक्षों ने तीव्र गति रेलवे क्षेत्र में सहयोग के लिए एक घोषणा-पत्र और गोपनीय डेटा की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा समझौते को भी अंतिम रूप दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भारत की ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) प्रणाली का विस्तार पेरिस हवाई अड्डे और नीस तक करने पर भी सहमति व्यक्त की।

प्रधानमंत्री मोदी शनिवार रात को अपने सप्ताहभर के फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे के तहत इस फ्रांसीसी शहर पहुंचे।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘भारत-फ्रांस साझेदारी नयी ऊंचाइयां छूती रहेगी।’’

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि मोदी-मैक्रों की चर्चा में द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे को शामिल किया गया, जिसमें रक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष, असैन्य परमाणु ऊर्जा, व्यापार और निवेश, तकनीक, नवाचार, शिक्षा, दोनों देशों के लोगों के बीच आवाजाही तथा लोगों के बीच परस्पर संबंध शामिल हैं।

नवाचार रूपरेखा, अगले पांच वर्षों में वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य और एक संयुक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ढांचा शामिल हैं।

दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत मुख्य रूप से तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित थी, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिक प्रगति के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।

बैठक में फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनी दसॉ एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू जेट विमान खरीदने की भारत की योजना पर चर्चा हुई। मिसरी ने कहा कि मुख्य फोकस संयुक्त रक्षा परियोजनाओं में ‘‘अधिक से अधिक स्थानीय सामग्री’’ शामिल करने पर रहा।

विदेश सचिव ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमान कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मेक-इन-इंडिया’ अवधारणा को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच रक्षा परियोजनाओं के लिए ‘को-डेवलपमेंट, को-डिजाइन, को-प्रोडक्शन’ रूपरेखा को अपनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘आज की बातचीत में राफेल और दूसरे मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन मुख्य बात यह थी कि किसी भी रक्षा मंच के मामले में हम इस आधार पर आगे बढ़ेंगे कि उसमें अधिक से अधिक स्थानीय सामग्री और स्थानीय विनिर्माण हो और हमारा सहयोग इसी बात को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए।’’

भारत के मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (एमआरएफए) परियोजना के तहत ‘दसॉ एविएशन’ 18 तैयार राफेल की आपूर्ति करेगा और बाकी राफेल भारत में लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ बनाए जाएंगे।

मोदी और मैक्रों के बीच बातचीत मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में संबंध मजबूत करने पर केंद्रित रही, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिक प्रगति के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।

मिसरी ने कहा, ‘‘चर्चा का प्रमुख केंद्र आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर भी रहा। यह विशेष रूप से इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि इस वर्ष की शुरुआत में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ताएं पूरी हो चुकी हैं।’’

दोनों पक्षों ने असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करने पर भी विस्तार से चर्चा की, जिसमें जैतापुर परियोजना भी शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘चर्चा मुख्य रूप से ईडीएफ (इलेक्ट्रिसिटी डी फ्रांस) और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के बीच इस परियोजना के तकनीकी पहलुओं और परियोजना के बहुत महत्वपूर्ण वित्तीय पहलुओं दोनों पर हुई।’’

मिसरी ने कहा कि छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टरों के पहलू पर हुई चर्चाओं में एक ‘‘गहन और सार्थक विमर्श’’ का मार्ग खुला है।

विदेश सचिव ने फ्रांस में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपाआई) के विस्तार के बारे में भी बात की।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पता चला है कि अगले कुछ दिनों या आने वाले हफ्ते में यूपीआई की सुविधा पेरिस के चार्ल्स डी गॉल हवाई अड्डे और नीस हवाई अड्डे पर भी उपलब्ध होगी।’’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-फ्रांस नवाचार रूपरेखा 2030 का उद्देश्य अत्याधुनिक और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ स्टार्टअप के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करना है, साथ ही शैक्षणिक गतिशीलता और उद्योग–शिक्षा जगत के बीच संबंधों को बढ़ावा देना भी है।

दोनों पक्षों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक उच्च-स्तरीय तंत्र के गठन की भी घोषणा की।

वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 16 अरब अमेरिकी डॉलर का है। आर्थिक सुरक्षा के लिए एक अलग संवाद तंत्र की भी घोषणा की गई।

संयुक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कार्य समूह का गठन एआई व्यवस्था को बढ़ावा देने तथा संयुक्त अनुसंधान और विकास, क्षमता निर्माण और उद्योगों के बीच आदान-प्रदान को समर्थन देने के उद्देश्य से किया गया है।

दोनों पक्षों ने पेरिस हवाई अड्डे और नीस में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के उपयोग का विस्तार करने का भी निर्णय लिया, जिससे यूरोप में भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की पहुंच और मजबूत होगी।

इस कदम से भारतीय पर्यटकों, विद्यार्थियों, प्रवासी समुदाय और व्यापार के सिलसिले में यात्रा करने वालों को भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

मोदी-मैक्रों की बैठक के बाद, दोनों पक्षों ने कानपुर में विमानन और संबद्ध क्षेत्रों में कौशल विकास के लिए एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की भी घोषणा की।

यह केंद्र विमानन और एयरोस्पेस क्षेत्रों में कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और अनुसंधान को समर्थन देगा। इसके साथ ही यह विनिर्माण तथा एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और संचालन) क्षेत्रों के लिए कार्यबल को मजबूत करने की भी उम्मीद है।

इसके अलावा मुख्य रूप से नवाचार और डिजिटल क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं में सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी।

मिसरी ने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए एक उच्च-स्तरीय तंत्र की स्थापना, आर्थिक सुरक्षा पर एक संवाद की शुरुआत, नवाचार रूपरेखा 2030 को अपनाना, दोनों देशों के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े संस्थानों के बीच 19 समझौतों पर हस्ताक्षर, तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर केंद्रित एक संयुक्त कार्य समूह के गठन को प्रमुख उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने नयी शिक्षा नीति के तहत फ्रांस के विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर खोलने के लिए आमंत्रित किया और राष्ट्रपति मैक्रों की प्रतिबद्धता का स्वागत किया।’’

विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी और मैक्रों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने का आह्वान किया, जो द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ाने का एक ‘‘अनोखा अवसर’’ प्रदान करता है।

भाषा सुरभि प्रशांत

प्रशांत


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