मोदी का इंडोनेशिया दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था के लिए अहम: विशेषज्ञों ने कहा
मोदी का इंडोनेशिया दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था के लिए अहम: विशेषज्ञों ने कहा
जकार्ता, पांच जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आठ साल बाद इस सप्ताह एक बार फिर इंडोनेशिया की द्विपक्षीय यात्रा करेंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक उनकी यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नयी दिल्ली और जकार्ता के बीच करीबी सहयोग की जरूरत है।
‘ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ की वरिष्ठ विश्लेषक फिट्रियानी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को ईमेल के जरिए बताया कि, ‘‘भारत और इंडोनेशिया हिंद महासागर के दोनों सिरों पर भौगोलिक रूप से अहम स्थिति में हैं और दोनों ही एक स्थिर, समावेशी और नियम आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था बनाए रखने में रुचि रखते हैं।’’
‘इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ इंडोनेशिया’ के एसोसिएट प्रोफेसर हजा मिन फधली रॉबी ने कहा, ‘‘एक स्थिर और सुरक्षित क्षेत्रीय व्यवस्था से भारतीय अर्थव्यवस्था को पश्चिम एशिया और दक्षिण चीन सागर में संभावित अस्थिरता के बीच फलने-फूलने में मदद मिलेगी।’’
विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह नयी दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मोदी छह से आठ जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा पर रहेंगे। यह उनकी इस देश की चौथी यात्रा होगी, लेकिन मई 2018 के बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी।
विदेश मंत्री ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लिए रवाना होने से पहले, मोदी राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ बातचीत करेंगे, जकार्ता में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करेंगे और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे।
फिट्रियानी ने कहा, ‘‘यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं और आपूर्ति शृंखला की मजबूती पर फिर से ध्यान दिया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा कि यह दौरा उस ‘लय’ को आगे बढ़ाता है जो पिछले साल सुबियांतो के नयी दिल्ली दौरे से बनी थी, जब उन्होंने भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई थीं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह तथ्य कि प्रधानमंत्री मोदी के ताजा हिंद-प्रशांत दौरे का पहला पड़ाव इंडोनेशिया है, यह दिखाता है कि नयी दिल्ली अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ और हिंद-प्रशांत रणनीतियों में जकार्ता को कितना महत्व देती है।’’
दोनों विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रह्मोस मिसाइल का संभावित सौदा एक अहम मुद्दा बना हुआ है।
रॉबी ने कहा, ‘‘हाल ही में इंडोनेशिया की संसद में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली को खरीदने पर बहस हुई है।’’ उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया के वित्तीय संकट के कारण वहां के सांसदों ने इस सौदे के समय पर सवाल उठाए हैं।
भाषा संतोष देवेंद्र
देवेंद्र

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