काठमांडू, 30 अगस्त (भाषा) नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा और नुवाकोट जिलों में नौ जलविद्युत परियोजनाओं के 537 कर्मचारी और कामगार अब भी लापता हैं। बचाव दल उन लोगों तक पहुंचने के प्रयास तेज कर रहे हैं, जिनके मलबे और मिट्टी से बंद सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है।
बचाव अभियान में सुरंगों के प्रवेश द्वारों पर जमा मिट्टी और मलबे, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे, दुर्गम इलाकों और खराब मौसम के कारण बाधा आ रही है। इसके चलते नेपाल ने भारत, चीन और अन्य देशों से विशेष तकनीकी सहायता मांगी है।
नेपाल के ‘इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन’ (आईपीपीएएन) के अनुसार, 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद दोनों जिलों की नौ जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 898 कर्मचारी और कामगारों से संपर्क टूटने की शुरुआती जानकारी मिली थी।
इनमें से 361 लोगों को बचा लिया गया है, जबकि 537 लोग अब भी लापता हैं। स्थानीय मीडिया ने आईपीपीएएन के हवाले से यह जानकारी दी है।
मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक, सबसे गंभीर स्थिति रसुवा में स्थित 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में है। यहां करीब 300 लोगों के परियोजना की सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका है।
नुवाकोट में स्थित 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना में सुरंग का प्रवेश द्वार मिट्टी और मलबे से दब जाने के बाद बचाव अभियान में कुछ प्रगति हुई है।
समाचार वेबसाइट ‘नेपाल न्यूज’ के अनुसार, नेपाली सेना ने खुदाई करने वाली मशीनों और बुलडोजरों को हेलीकॉप्टर से नुवाकोट के बाट्टर पहुंचाया, ताकि बाढ़ प्रभावित परियोजना स्थल तक पहुंच बनाई जा सके।
सेना के अधिकारियों ने बताया कि संयुक्त बचाव दल चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं और सुरंग के प्रवेश बिंदु पर अभियान के निर्णायक चरण में पहुंचने की उम्मीद है।
एक अलग रिपोर्ट में कहा गया कि बचावकर्मियों ने दबी हुई सुरंग के ऊपरी हिस्से का पता लगा लिया है। इसके बाद उन्होंने एक ड्रिल किए गए छेद के जरिये अंदर कैमरा और ऑक्सीजन पहुंचाना शुरू किया, ताकि सुरंग के भीतर की स्थिति का आकलन किया जा सके।
आईपीपीएएन के अनुसार, 22 मेगावाट की चिलिमे जलविद्युत परियोजना में आठ लोगों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। वहीं परियोजना के अधिकारियों का कहना है कि छह कर्मचारियों के सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका है।
परियोजना के सीईओ बाबुराजा महर्जन ने समाचार पोर्टल ‘ऑनलाइनखबर’ को बताया कि शनिवार को सिमरिक एयर के हेलीकॉप्टर से घटनास्थल पर पहुंचाई गई पर्वतारोहण बचाव टीम सुरंग के अंदर गई, लेकिन करीब 100 मीटर आगे जाने के बाद सुरंग पूरी तरह मिट्टी से बंद मिली।
महर्जन ने समाचार पोर्टल को बताया कि टीम के मुताबिक, इस अवरोध को हटाने और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए उपयुक्त उपकरणों के साथ विशेष बचाव अभियान चलाने की जरूरत होगी।
इस बीच, नेपाल के सुरंग बचाव अभियान में मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता भी पहुंच रही है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि डॉक्टरों, पराचिकित्सा कर्मचारियों और सुरंग के विशेषज्ञ इंजीनियरों समेत 11 सदस्यों वाली भारतीय तकनीकी टीम ने शनिवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया।
यह टीम शुक्रवार को काठमांडू पहुंची थी और शनिवार को नुवाकोट जिले के त्रिशूली पहुंची।
नेपाल के अधिकारियों और भारतीय दूतावास के अनुसार, टीम ने बचाव अभियान के लिए स्थलों का आकलन करने से पहले चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया।
‘काठमांडू पोस्ट’ ने बताया कि भारतीय टीम को नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के समन्वय से चिलिमे और लांगटांग पहुंचाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल ने चीन और दक्षिण कोरिया की टीमों को भी विशेष बचाव अभियान में मदद करने की अनुमति दी है।
उन्होंने बताया कि सुरंग विशेषज्ञों की छह-सदस्यीय चीनी टीम भी बचाव अभियान में सहायता के लिए नेपाल पहुंच गई है।
चीन की कंपनी चाइना रेलवे परियोजना में सिविल निर्माण का काम कर रही है और विशेषज्ञ उसी कंपनी के समन्वय से नेपाल पहुंचे हैं।
हालांकि, चीनी टीम को अलग से अपर त्रिशूली-3बी जलविद्युत परियोजना में बचाव अभियान में मदद के लिए तैनात किया गया है।
‘द हिमालयन टाइम्स’ के अनुसार, चीनी विशेषज्ञ हेलीकॉप्टर से त्रिशूली क्षेत्र पहुंचे और सुरंग की स्थिति का आकलन करने तथा बचाव अभियान चलाने की संभावना का पता लगाने के लिए नेपाली सेना की तकनीकी टीम के साथ समन्वय कर रहे हैं।
भाषा गोला सुरेश
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