ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी की अमेरिकी घोषणा के बाद तेल की कीमतों में उछाल

ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी की अमेरिकी घोषणा के बाद तेल की कीमतों में उछाल

ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी की अमेरिकी घोषणा के बाद तेल की कीमतों में उछाल
Modified Date: April 13, 2026 / 08:37 am IST
Published Date: April 13, 2026 8:37 am IST

न्यूयॉर्क, 13 अप्रैल (एपी) अमेरिका द्वारा सोमवार से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू करने की घोषणा के बाद बाजार में शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में तेजी आई।

अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत आठ प्रतिशत बढ़कर 104.24 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल का मूल्य सात प्रतिशत बढ़कर 102.29 अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया।

ईरान युद्ध के दौरान ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया है। फरवरी के आखिर में युद्ध शुरू होने से पहले इसकी कीमत लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी जो कुछ समय में बढ़कर 119 अमेरिकी डॉलर से अधिक तक पहुंच गई। शुक्रवार को शांति वार्ता से पहले जून के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 0.8 प्रतिशत गिरकर 95.20 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रह गया था।

वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का प्रभावी नियंत्रण रहा है।

‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने या वहां से निकलने वाले ‘‘सभी देशों के पोतों के खिलाफ’’ यह नाकेबंदी ‘‘निष्पक्ष रूप से लागू’’ की जाएगी।

उसने कहा कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले पोतों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।

विश्व भर में होने वाले तेल के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा प्रतिदिन होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और ईरान तेल के बड़े निर्यातक हैं।

संघर्षविराम के बाद के दिनों में भी जलडमरूमध्य में आवाजाही सीमित रही है। समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने वाली एजेंसियों के अनुसार, संघर्षविराम शुरू होने के बाद से 40 से अधिक वाणिज्यिक पोत इस रास्ते से गुजर चुके हैं।

एपी सिम्मी शोभना

शोभना


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