पाक रक्षामंत्री ने पीओके के प्रदर्शनकारियों को भारत जैसा ‘दुश्मन’ बताया, बातचीत से इनकार

पाक रक्षामंत्री ने पीओके के प्रदर्शनकारियों को भारत जैसा ‘दुश्मन’ बताया, बातचीत से इनकार

पाक रक्षामंत्री ने पीओके के प्रदर्शनकारियों को भारत जैसा ‘दुश्मन’ बताया, बातचीत से इनकार
Modified Date: July 29, 2026 / 05:40 pm IST
Published Date: July 29, 2026 5:40 pm IST

इस्लामाबाद, 29 जुलाई (भाषा) पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में प्रदर्शनकारियों को भारत की तरह ‘दुश्मन’ बताते हुए कहा है कि उनके साथ कोई बातचीत नहीं की जाएगी।

इस बीच, पीओके में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 20 हो गई।

प्रतिबंधित ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने बुधवार को कहा कि सोमवार से पीओके में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ हुई झड़पों में उसके कम से कम 20 कार्यकर्ता मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं।

हालांकि, कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने मृतकों की संख्या पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की।

ख्वाजा आसिफ ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, ‘‘प्रदर्शनकारियों के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। मैं उन्हें भारत की ही श्रेणी में मानता हूं और उन्हें पाकिस्तान का दुश्मन समझता हूं।’’

वहीं, प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि जेएएसी ने उनके साथ एक बैठक की थी और अपनी 38 मांगें रखी थीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद और मीरपुर पर बलपूर्वक कब्जा करना चाहते हैं। सनाउल्लाह ने मंगलवार को दावा किया कि वे फिलहाल ‘‘भारत जैसे हमले’’ में लगे हुए हैं।

सनाउल्लाह ने यह भी दावा किया कि कानून प्रवर्तन कर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में किसी की मौत नहीं हुई है।

इस बीच, बीबीसी उर्दू की खबर के अनुसार, बुधवार को मीरपुर में दुकानें और बाजार बंद रहे।

पीओके की तथाकथित विधानसभा की 13 सीट के लिए सोमवार को हुए पहले चरण के चुनाव में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने नौ सीट जीतीं। बाकी 32 सीट के लिए दूसरे और तीसरे चरण का चुनाव क्रमश: दो और 10 अगस्त को होगा।

पीओके में मुख्य मुकाबला पीएमएल-एन और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के बीच है, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने चुनाव का बहिष्कार किया है।

पहले चरण का चुनाव हिंसा और बड़े पैमाने पर धांधली के आरोपों से प्रभावित रहा। केंद्र में पीएमएल-एन के साथ गठबंधन में शामिल पीपीपी ने आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर हेरफेर करके पीएमएल-एन को अधिकतर सीट दिलाई गईं।

जेएएसी पिछले महीने से पीओके में तथाकथित क्षेत्रीय विधानसभा की 12 विवादित सीट को लेकर प्रदर्शन कर रही है। उसका आरोप है कि प्रतिष्ठान इन सीट के जरिये अपनी पसंद के प्रधानमंत्री को सत्ता में लाने के लिए हस्तक्षेप करता है।

भारत ने मंगलवार को इन चुनाव को पाकिस्तान द्वारा अपने अवैध कब्जे और क्षेत्र में मानवाधिकारों के ‘गंभीर’ उल्लंघनों को छिपाने की कोशिश बताया था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को दिल्ली में कहा, ‘‘इस मामले पर भारत का रुख स्पष्ट, एक समान और सर्वविदित है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें वर्तमान में पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि हमने पहले भी कहा है, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी बड़े पैमाने के विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के आर्थिक शोषण, लोगों के मौलिक अधिकारों से इनकार और उसके प्रशासनिक दमन का सीधा परिणाम हैं।’’

जेएएसी ने दावा किया कि सोमवार को रावलकोट से मुजफ्फराबाद की ओर निकाले गए उसके मार्च के दौरान कानून प्रवर्तन कर्मियों की गोलीबारी में उसके कार्यकर्ता मारे गए। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

जेएएसी की मुख्य समिति सदस्य आबिद शाहीन ने बीबीसी को बताया कि सोमवार की झड़पों में करीब एक दर्जन कार्यकर्ता मारे गए और 20 से अधिक घायल हुए।

एक अन्य समिति सदस्य इम्तियाज असलम ने कहा कि मारे गए लोगों में जेएएसी संस्थापक सदस्य उमर नजीर के छोटे भाई उस्मान नजीर भी शामिल हैं।

शाहीन ने दावा किया कि शवों को ड्रेक के पास स्थित एक मेडिकल शिविर में ले जाया गया है, जहां जेएएसी पिछले डेढ़ महीने से धरना दे रही है।

जेएएसी ने यह भी दावा किया कि उसके मार्च में शामिल लोग हथियारों से लैस नहीं थे और केवल लाठियां लेकर चल रहे थे। पीओके पुलिस प्रमुख कैप्टन (सेवानिवृत्त) लियाकत अली मलिक ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के पास आधुनिक हथियार थे और वे सुरक्षा कर्मियों को निशाना बना रहे थे।

मलिक ने कहा कि मौतों की आधिकारिक पुष्टि शव बरामद होने, रिकॉर्ड किए जाने या अस्पतालों में पोस्टमार्टम के बाद ही हो सकेगी।

जेएएसी ने नौ जून से पीओके में विरोध प्रदर्शन और मार्च शुरू किया था। सोमवार की हिंसा से पहले अशांति में कथित तौर पर 40 लोग मारे जा चुके थे, जिनमें 34 प्रदर्शनकारी और छह पुलिस एवं अर्द्धसैनिक कर्मी शामिल थे।

विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने प्रदर्शन खत्म कराने के लिए जेएएसी के साथ बातचीत शुरू की थी, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका है।

प्राधिकारियों ने क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। इसके अलावा, जेएएसी के प्रदर्शन की कवरेज पर पाकिस्तान में पूरी तरह मीडिया प्रतिबंध लगा दिया गया है।

पीओके की तथाकथित विधानसभा में कुल 53 सीट हैं, जिनमें से 45 पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि आठ सीट महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित हैं।

भाषा अमित सुरेश

सुरेश


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