सिंगापुर की वर्कर्स पार्टी ने प्रीतम सिंह को निर्विरोध महासचिव चुना

सिंगापुर की वर्कर्स पार्टी ने प्रीतम सिंह को निर्विरोध महासचिव चुना

सिंगापुर की वर्कर्स पार्टी ने प्रीतम सिंह को निर्विरोध महासचिव चुना
Modified Date: June 29, 2026 / 08:35 am IST
Published Date: June 29, 2026 8:35 am IST

(गुरदीप सिंह)

सिंगापुर, 29 जून (भाषा) सिंगापुर की वर्कर्स पार्टी ने रविवार को प्रीतम सिंह को एक बार फिर अपना महासचिव चुन लिया। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब विपक्ष के नेता प्रीतम सिंह कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

हाल ही में उन्हें एक साथी सांसद से जुड़े मामले में संसद में झूठ बोलने का दोषी ठहराया गया था।

सिंह (50) को पार्टी सदस्यों ने निर्विरोध महासचिव चुना। यह पार्टी इस द्वीपीय देश के सबसे छोटे विपक्षी समूहों में से एक है, जहां 1965 में पड़ोसी देश मलेशिया से अलग होने और स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से ही पीपुल्स एक्शन पार्टी (पीएपी) लगातार सत्ता में है।

संसद में झूठ बोलने के मामले में जारी कानूनी प्रक्रिया के दौरान प्रीतम सिंह से विपक्ष के नेता का पद भी छीन लिया गया था।

वर्कर्स पार्टी के पास संसद में 12 सीटें हैं, जिनमें दो ‘नॉन-कॉन्स्टिट्यूएंसी’ सांसद शामिल हैं। ये सीटें उन उम्मीदवारों को दी जाती हैं, जो चुनाव हारने वालों में सबसे अधिक मत प्राप्त करते हैं।

वहीं, प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग के नेतृत्व वाली पीपुल्स एक्शन पार्टी (पीएपी) के पास संसद में 87 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत है। इसके अलावा, संसद में नौ नामित सांसद भी हैं, जिन्हें सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में उनके योगदान के आधार पर नामित किया जाता है।

पुन: निर्वाचित होने के बाद मीडिया से बातचीत में प्रीतम सिंह ने कहा, ‘‘पार्टी समझती है कि उसका उद्देश्य विवेकपूर्ण और जिम्मेदार तरीके से काम करना तथा सिंगापुरवासियों का ईमानदारी से प्रतिनिधित्व करना है। यदि हमें ऐसा करते रहना है, तो हमें एकजुट रहना होगा, जैसा कि किसी भी जिम्मेदार और सम्मानित राजनीतिक दल को करना चाहिए।’’

सिंह 2018 से वर्कर्स पार्टी के महासचिव हैं और 2011 से सांसद हैं। वह स्वतंत्रता के बाद सिंगापुर के पहले विपक्ष के नेता बने थे। इस पद पर उनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी।

सिल्विया लिम (61) भी पार्टी अध्यक्ष के रूप में दोबारा चुनी गईं। वह 2003 से इस पद पर हैं।

पार्टी ने अपनी सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था केंद्रीय कार्यकारी समिति (सीईसी) के लिए 12 अन्य सदस्यों का भी चुनाव किया। इनमें अधिकतर सदस्य पिछली सीईसी से ही दोबारा चुने गए हैं।

भारतीय मूल के 60 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता हरप्रीत सिंह भी सीईसी में शामिल हुए हैं। हालांकि, वह मई 2025 के आम चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके थे।

भाषा गोला शोभना

शोभना


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