दक्षिण कोरिया की अदालत ने अपदस्थ राष्ट्रपति यून की पत्नी को भ्रष्टाचार के आरोपों में दोषी ठहराया

दक्षिण कोरिया की अदालत ने अपदस्थ राष्ट्रपति यून की पत्नी को भ्रष्टाचार के आरोपों में दोषी ठहराया

दक्षिण कोरिया की अदालत ने अपदस्थ राष्ट्रपति यून की पत्नी को भ्रष्टाचार के आरोपों में दोषी ठहराया
Modified Date: April 28, 2026 / 08:52 pm IST
Published Date: April 28, 2026 8:52 pm IST

सियोल, 28 अप्रैल (एपी) दक्षिण कोरिया के अपदस्थ राष्ट्रपति यून सुक येओल की पत्नी को भ्रष्टाचार के आरोप में दी गई सजा को अपीली अदालत ने बढ़ाकर चार साल कर दिया है।

यून को विद्रोह के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के लगभग दो महीने बाद यह फैसला सुनाया गया है।

जनवरी में, पूर्व प्रथम महिला किम केओन ही को जिला अदालत ने 20 महीने की सजा सुनाई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने चर्च से राजनीतिक लाभ के वादे के बदले उपहार स्वीकार किए, जिनमें हीरे का हार और एक बैग शामिल था।

हालांकि, उन्हें उस स्टॉक मूल्य हेरफेर योजना में संलिप्तता से बरी कर दिया गया, जो उनके प्रथम महिला बनने से पहले की घटना से जुड़ी थी।

दोनों पक्षों ने अपील दायर की थी, और मंगलवार को सियोल उच्च न्यायालय ने उन्हें चर्च से एक और बैग लेने तथा शेयर मूल्य में हेरफेर के आरोप में दोषी ठहराते हुए उनकी सजा बढ़ाकर चार वर्ष कर दी।

दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लागू किए जाने के बाद यून विवादों में फंस गए। उन पर महाभियोग चलाया गया और अंततः उन्हें पद से हटा दिया गया। यून को मार्शल लॉ की विफलता और अन्य घोटालों से संबंधित कई आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। जांचकर्ताओं का कहना है कि यून के मार्शल लॉ लागू करने में किम शामिल नहीं थीं।

सियोल उच्च न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रपति के सबसे करीबी होने के नाते, प्रथम महिला अपने पति के साथ मिलकर देश का प्रतिनिधित्व करती हैं और उन पर उनका काफी प्रभाव होता है। अदालत ने कहा कि किम अपनी ईमानदारी को लेकर जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरीं और इसके बजाय उन्होंने चर्च से उपहार प्राप्त करने के लिए अपनी हैसियत का दुरुपयोग किया।

किम के पास देश की शीर्ष अदालत में अपील करने के लिए एक सप्ताह का समय है। किम पिछले साल अगस्त से जेल में है, जब सियोल जिला अदालत ने उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया था।

फरवरी में, सियोल जिला अदालत ने यून को विद्रोह का दोषी करार किया। उन पर आरोप था कि उन्होंने संसद पर कब्ज़ा करने, राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को गिरफ्तार करने और अनिश्चितकाल तक सत्ता में रहने के लिए सेना और पुलिस बलों को अवैध रूप से तैनात किया था।

एपी आशीष रंजन

रंजन


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