नीदरलैंड ने भारत को चोल राजवंश के ताम्रपत्रों को वापस किया
नीदरलैंड ने भारत को चोल राजवंश के ताम्रपत्रों को वापस किया
(तस्वीरों के साथ)
हेग, 16 मई (भाषा) नीदरलैंड ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में चोल राजवंश से जुड़े ताम्रपत्र शनिवार को भारत को वापस लौटा दिये।
ये ताम्रपत्र 11वीं शताब्दी के हैं और इस पहल को दोनों देशों के बीच संबंधों के प्रगाढ़ होने के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात की संक्षिप्त यात्रा के बाद नीदरलैंड पहुंचे। यह उनके पांच देशों की यात्रा का दूसरा पड़ाव है, जिसमें स्वीडन, नॉर्वे और इटली भी शामिल हैं।
भारत 2012 से अनाइमंगलम ताम्रपत्रों की वापसी के लिए प्रयासरत है, जिन्हें नीदरलैंड में लीडेन प्लेट्स के नाम से जाना जाता है।
ये 21 ताम्रपत्र चोल राजवंश के सबसे महत्वपूर्ण बचे हुए अभिलेखों में से एक माने जाते हैं और भारत के बाहर कहीं भी मौजूद तमिल विरासत की महत्वपूर्ण कलाकृतियों में से हैं।
राज राज चोल प्रथम के काल के इन ताम्रपत्रों का वजन लगभग 30 किलोग्राम है और ये चोल राजवंश की शाही मुहर वाली एक कांस्य की अंगूठी से एक साथ बंधी हुई हैं।
इन ताम्रपत्रों को दो भागों में बांटा गया है। एक भाग में संस्कृत में पाठ हैं, दूसरे में तमिल में।
राजराज चोल प्रथम एक हिंदू सम्राट थे जिन्होंने एक बौद्ध मठ के लिए राजस्व बंदोबस्ती प्रदान की थी।
राजराज चोल प्रथम ने मूल रूप से इस संबंध में मौखिक आदेश दिया था, जिसे ताड़पत्रों पर अंकित किया गया था, लेकिन उनके पुत्र राजेंद्र चोल प्रथम ने अनुदान आदेश को टिकाऊ ताम्रपत्रों पर उत्कीर्ण करवाकर इसे संरक्षित किया। ताम्रपत्रों को जोड़ने वाले पीतल के छल्ले पर राजेंद्र चोल की मुहर लगी है।
इन ताम्रपत्रों को 1700 वीं शताब्दी में फ्लोरेंटियस कैम्पर द्वारा नीदरलैंड लाया गया था, जो उस समय भारत में एक ईसाई मिशनरी का सदस्य था। ताम्रपत्र पर उल्लिखित शहर तमिलनाडु का नागपट्टनम है जो उस समय नीदरलैंड के नियंत्रण में था।
वापसी और क्षतिपूर्ति पर अंतरसरकारी समिति के 24वें सत्र में पाया गया कि ताम्रपत्रों के मूल देश के रूप में भारत का दावा वैध है।
समिति ने नीदरलैंड को ताम्रपत्रों की वापसी के संबंध में भारत के साथ रचनात्मक द्विपक्षीय संवाद में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
नीदरलैंड ने प्रधानमंत्री मोदी की हेग यात्रा के दौरान ताम्रपत्रों को सौंपने का फैसला किया।
भाषा धीरज माधव
माधव

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