अमेरिकी सेना पांच सैन्य अड्डों पर परमाणु सूक्ष्म रिएक्टर बनाने में दो अरब डॉलर खर्च करेगी

अमेरिकी सेना पांच सैन्य अड्डों पर परमाणु सूक्ष्म रिएक्टर बनाने में दो अरब डॉलर खर्च करेगी

अमेरिकी सेना पांच सैन्य अड्डों पर परमाणु सूक्ष्म रिएक्टर बनाने में दो अरब डॉलर खर्च करेगी
Modified Date: August 27, 2026 / 09:44 am IST
Published Date: August 27, 2026 9:44 am IST

वाशिंगटन, 27 अगस्त (एपी) अमेरिका की सेना ने बुधवार को घोषणा की कि वह न्यूयॉर्क से लेकर टेक्सास तक अपने पांच सैन्य अड्डों पर परमाणु सूक्ष्म-रिएक्टर लगाने की योजना बना रही है। ये रिएक्टर वाणिज्यिक विद्युत ग्रिड से स्वतंत्र ऊर्जा का भरोसेमंद स्रोत होंगे।

यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अगली पीढ़ी की परमाणु ऊर्जा विकसित करने के लिए जोर-शोर से काम कर रहा है।

इसमें डेटा केंद्रों से बिजली की तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने के उद्देश्य से बड़े परमाणु रिएक्टरों के लिए अरबों डॉलर का ऋण देना और सैन्य एवं आम नागरिकों के इस्तेमाल के लिए आधुनिक रिएक्टर डिजाइन और परियोजनाओं को बढ़ावा देने वाला एक प्रायोगिक कार्यक्रम शामिल है। आज अमेरिका में कोई भी परमाणु सूक्ष्म-रिएक्टर वाणिज्यिक विद्युत ग्रिड को बिजली की आपूर्ति नहीं कर रहा है।

सेना द्वारा चुनी गई पांच कंपनियों को सूक्ष्म-रिएक्टर के मालिकाना हक, उनके निर्माण और संचालन के लिए पांच साल में कुल 2.2 अरब अमेरिकी डॉलर तक दिए जाएंगे बशर्ते वे अपने प्रदर्शन के लिए तय किए गए लक्ष्यों को पूरा करें। सेना को उम्मीद है कि 20 से अधिक परमाणु सूक्ष्म-रिएक्टर का निर्माण और उनका संचालन किया जाएगा।

सेना और उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि ग्रिड ठप होने की स्थिति में सूक्ष्म-रिएक्टर सैन्य अड्डों पर जरूरी बुनियादी ढांचा के लिए बिजली का एक मजबूत जरिया साबित हो सकते हैं। ये रिएक्टर बिना दोबारा ईंधन भरे सालों तक चल सकते हैं।

सैन्य सचिव डैन ड्रिस्कॉल ने कहा कि इन ठेकों से सेना की अपने प्रतिष्ठानों को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से निरंतर बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हम दुनिया भर में सैन्य ताकत को प्रभावी ढंग से तैनात करने के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर रहने के मकसद से जरूरी ऊर्जा सुरक्षा व्यवस्था तैयार कर रहे हैं, ताकि संभावित रूप से कमजोर बाहरी बिजली ग्रिड पर निर्भर नहीं रहना पड़े।’’

एपी सुरभि वैभव

वैभव


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