संरा प्रमुख ने एआई कंपनियों से पर्यावरण प्रभाव पर रिपोर्ट जारी करने, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की अपील की
संरा प्रमुख ने एआई कंपनियों से पर्यावरण प्रभाव पर रिपोर्ट जारी करने, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की अपील की
संयुक्त राष्ट्र, 23 जून (एपी) संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने मंगलवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कंपनियों से अपने कार्बन उत्सर्जन तथा संस्थान के संचालन में उपयोग में लाये जाने वाले जल और जमीन के बारे में रिपोर्ट जारी करने की अपील की।
गुतारेस ने ‘लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक’ में अपने संबोधन के दौरान कार्रवाई का आग्रह करते हुए एआई पर्यावरण पारदर्शिता पहल का प्रस्ताव किया। उन्होंने तर्क दिया कि एआई कंपनियों को अपनी तेजी से लोकप्रिय हो रही प्रौद्योगिकी के असर को मापना और उसे सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही वह प्रभाव है जिसे डेटा सेंटर के तेजी से बढ़ते विस्तार पर रोक लगाने की वजह बताया जा रहा है।
इन कंपनियों पर सरकारों और उन इलाकों के स्थानीय लोगों, जहां एआई के डेटा सेंटर हैं, की ओर से लगातार दबाव बढ़ रहा है कि वे अधिक पारदर्शिता बरतें और पूरे उद्योग में जानकारी साझा करने के लिए एक जैसा मानक अपनाएं।
गुतारेस ने कहा कि एआई कंपनियों को 2030 तक अपने संस्थानों को पवन और सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय प्रौद्योगिकी से बनी बिजली से संचालित करने का संकल्प लेना चाहिए।
गुतारेस ने यूरोप के सबसे बड़े स्वतंत्र जलवायु सम्मेलन में कहा, ‘‘अब कोई छिपी हुई लागत नहीं…अब उन लोगों पर बोझ नहीं डाला जाएगा जो इसे वहन करने में सबसे कम सक्षम हैं। अब समय आ गया है कि सच्चाई को पूरी तरह सामने लाया जाए।’’
एआई की बढ़ती जरूरत:
कई बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों ने अपने संचालन को स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से संचालित करने का संकल्प लिया है, जिनमें से कुछ ने यह लक्ष्य इस दशक के अंत तक हासिल करने की बात कही है। इनमें से कुछ कंपनियां, विशेष रूप से सौर और परमाणु ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से यह लक्ष्य पूरा करने की योजना बना रही हैं। इन कंपनियों में अमेजन और गूगल भी शामिल हैं।
लेकिन एआई की ओर बढ़ने की होड़ ने उन वादों को मुश्किल बना दिया है और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को बहुत बढ़ा दिया है। यह उत्सर्जन तेल, कोयला और गैस जैसे ईंधन जलाने से होता है तथा धरती को गर्म करता है। नियमों से जुड़ी रुकावटों ने भी पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं में बाधा डाली है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, अभी दुनिया भर में डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाली बिजली का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा कोयला चालित ताप विद्युत संयंत्रों से आता है। नवीकरणीय ऊर्जा – मुख्य रूप से पवन, सौर और जल विद्युत – से लगभग 27 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस से 26 प्रतिशत और परमाणु ऊर्जा से 15 प्रतिशत बिजली प्राप्त होती है।
अगले पांच सालों में नवीकरणीय ऊर्जा से उस मांग का केवल आधा हिस्सा ही पूरा हो पाने की संभावना है।
एआई के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ, गुतारेस समेत कई लोगों ने जलवायु से जुड़ी समस्याओं के समाधान में तेजी लाने की इसकी क्षमता की सराहना की। इससे प्रदूषण और उत्सर्जन को कम किया जा सकता है।
वहीं, इस महीने की शुरुआत में जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर का पर्यावरण पर असर पहले से ही दुनिया के कुछ सबसे बड़े देशों के बराबर हो गया है।
उस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एआई से जुड़े पानी और ऊर्जा के इस्तेमाल और प्रदूषण में सिर्फ चार साल में दोगुना बढ़ोतरी होगी। एआई को संचालित करने के लिए जरूरी डेटा सेंटर ने 2025 में दुनिया की कुल बिजली खपत का लगभग 1.5 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल किया, और 2030 तक दुनिया की अनुमानित बिजली खपत का लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं सेंटर द्वारा इस्तेमाल किया जाएगा।
मंगलवार को गुतारेस ने कहा कि दुनिया को पूर्व औद्योगिक काल की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस की उष्मण सीमा से नीचे रखने के लिए कई कदम उठाने की जरूरत है। यह लक्ष्य 2015 के पेरिस समझौते के दौरान तय किया गया था।
उन्होंने मीथेन उत्सर्जन घटाने की बात कही। मीथेन एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए लगभग एक-तिहाई जिम्मेदार है और जलवायु परिवर्तन के लिए कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कहीं अधिक जिम्मेदार है, हालांकि यह वातावरण में कम समय तक रहती है। उन्होंने कोयले, तेल और गैस पर निर्भरता कम करने की भी बात कही।
एपी सुभाष नरेश
नरेश

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