बाल विवाह के प्रावधान वाले तालिबान के नये कानून पर संयुक्त राष्ट्र ने जताई गंभीर चिंता
बाल विवाह के प्रावधान वाले तालिबान के नये कानून पर संयुक्त राष्ट्र ने जताई गंभीर चिंता
काबुल, 21 मई (एपी) संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार द्वारा लाये गए एक नये कानून पर बृहस्पतिवार को ‘गंभीर चिंता’ व्यक्त करते हुए कहा कि इसमें बाल विवाह से जुड़े प्रावधान शामिल हैं, जो महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ भेदभाव को और बढ़ावा देते हैं।
दूसरी ओर तालिबान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से इस्लामी कानून के सिद्धांतों के अनुरूप है। उसने इस बात पर भी जोर दिया कि देश में लड़कियों के जबरन विवाह पर पहले से ही प्रतिबंध लागू है।
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने एक बयान में कहा कि अफगानिस्तान के न्याय मंत्रालय ने पिछले सप्ताह ‘पति-पत्नी के न्यायिक अलगाव पर’ आदेश संख्या 18 जारी किया था, जिसमें दंपति के अलग होने के नियम तय किए गए हैं। इसके सबसे विवादास्पद प्रावधानों में कहा गया है कि यदि कोई लड़की किशोरावस्था में प्रवेश कर चुकी है, तो उसकी चुप्पी को भी विवाह के लिए उसकी सहमति माना जा सकता है।
बयान के अनुसार, इस कानून में उन लड़कियों के अलगाव से जुड़ा एक खंड भी शामिल है जो किशोरावस्था की उम्र में पहुंच चुकी हैं और शादीशुदा हैं, जो ‘सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि देश में बाल विवाह की अनुमति है।’
अफगानिस्तान में महिलाएं और लड़कियां पहले से ही व्यापक भेदभाव का सामना कर रही हैं, जहां सख्त कानून यह तय करते हैं कि उन्हें कैसे कपड़े पहनने चाहिए और कैसा व्यवहार करना चाहिए। उन्हें माध्यमिक स्कूल, विश्वविद्यालयों और अधिकांश नौकरियों से प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा, उन्हें जिम, ब्यूटी पार्लर और सार्वजनिक उद्यानों सहित लगभग सभी मनोरंजक गतिविधियों से भी पूरी तरह निषिद्ध किया गया है।
हालांकि, यह कानून महिलाओं को अपने पति से अलग होने की अनुमति तो देता है, लेकिन उनके लिए इसकी प्रक्रिया को पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक कठिन बना दिया गया है।
भाषा
सुमित सुभाष
सुभाष

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