चीन के दो सबसे वरिष्ठ जनरलों को बर्खास्त किए जाने का क्या मतलब है?

चीन के दो सबसे वरिष्ठ जनरलों को बर्खास्त किए जाने का क्या मतलब है?

चीन के दो सबसे वरिष्ठ जनरलों को बर्खास्त किए जाने का क्या मतलब है?
Modified Date: January 31, 2026 / 05:34 pm IST
Published Date: January 31, 2026 5:34 pm IST

(डेविड एस जी गुडमैन, सिडनी विश्वविद्यालय द्वारा)

सिडनी, 31 जनवरी (द कन्वरसेशन) चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने पिछले सप्ताहांत देश के दो सबसे वरिष्ठ जनरलों झांग योउशिया और लियू झेनली को पद से हटाने की घोषणा की थी और कहा था कि गंभीर अनुशासनात्मक उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ जांच शुरू की जाएगी।

झांग अक्टूबर 2022 से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सबसे वरिष्ठ जनरल थे। वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के पोलित ब्यूरो के सर्वोच्च रैंकिंग वाले सैन्य सदस्य थे।

झांग केंद्रीय सैन्य आयोग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी थे, जो सशस्त्र बलों को नियंत्रित करता है।

लियू पीएलए की ‘ग्राउंड फोर्स’ के पूर्व कमांडर थे और हाल में केंद्रीय सैन्य आयोग के संयुक्त स्टाफ विभाग के प्रभारी थे।

चीन के बाहर इन घटनाक्रमों पर हुई प्रतिक्रिया ने सनसनीखेज सुर्खियां बटोरी हैं। बीबीसी की एक प्रमुख खबर की शुरुआत में मुख्य ध्यान ‘‘संकट में फंसी सेना’’ पर था। वहीं ‘ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन’ ने इसे एक ‘‘आश्चर्यजनक’’ घटनाक्रम करार दिया है।

निस्संदेह, ये कदम चौंकाने वाले हैं। लेकिन सीसीपी के नेतृत्व की आंतरिक कार्यप्रणाली के बारे में, जिसमें चीनी नेता शी चिनफिंग के पोलित ब्यूरो में उनके सहयोगियों के साथ संबंध भी शामिल हैं, इतनी कम जानकारी है कि इन घटनाक्रमों की व्याख्या करना मुश्किल, बल्कि असंभव ही है।

ऐतिहासिक और राजनीतिक कारणों से, पीएलए सीसीपी का एक संगठन है। ये दोनों संगठन शी चिनफिंग के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आते हैं।

झांग और लियू को हटाए जाने से अस्थायी रूप से सैन्य नेतृत्व केवल शी और जनरल झांग शेंगमिन के हाथों में रह गया है। केंद्रीय सैन्य आयोग के तीन अन्य सदस्य 2024 से अपने पद खो चुके हैं तथा उनकी जगह किसी और को नियुक्त नहीं किया गया है।

झांग और लियू को हाल में और भी वरिष्ठ पदों पर नियुक्त किया गया था। दोनों को शी के व्यक्तिगत समर्थकों के रूप में भी देखा जाता था। शी और झांग के पिताओं के बीच घनिष्ठ संबंध थे, जो 1930 के दशक में सीसीपी के शुरुआती दिनों से चले आ रहे थे, यानी 1949 में ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ की स्थापना से पहले के समय से।

इसके अलावा, झांग और लियू की बर्खास्तगी हाल के वर्षों में हुई अन्य वरिष्ठ सैन्य बर्खास्तगियों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से हुई और इसके कोई खास पूर्व संकेत भी नहीं मिले थे। दोनों व्यक्ति एक महीने पहले ही सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए थे।

बीते अनुभवों से यह बात निःसंदेह सिद्ध होती है कि एक बार जब कोई वरिष्ठ व्यक्ति अपना पद खो देता है या उसे किसी भी कारण से बर्खास्त कर दिया जाता है, तो उसके पतन के परिणामस्वरूप उस पर कई तरह के अपराधों के आरोप लगते हैं।

पोलित ब्यूरो ने अतीत में भी तीव्र आंतरिक राजनीति का सामना किया है, हालांकि ऐसे संघर्षों की सटीक परिस्थितियां आमतौर पर सामने आने में वर्षों लग जाते हैं।

झांग और लियू द्वारा ‘‘अनुशासन और कानून’’ का उल्लंघन करने के दावों को देखते हुए, उनकी बर्खास्तगी के दो संभावित कारण हो सकते हैं।

दोनों भ्रष्टाचार में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सकते हैं। हो सकता है कि उन्होंने अधिकारियों की नियुक्ति के लिए रिश्वत ली हो। इसके अलावा, केंद्रीय सैन्य आयोग और पोलित ब्यूरो के भीतर भ्रष्टाचार से निपटने के तरीके, विशेष रूप से सेना के भीतर भ्रष्टाचार से निपटने के तरीके को लेकर मतभेद होने की आशंका भी है।

शी चिनफिंग ने 2012 में सीसीपी महासचिव बनने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के महत्व पर बार-बार जोर दिया है।

इतने सारे लोगों को हटाए जाने से यह संकेत मिलता है कि पीएलए में अब संस्कृति परिवर्तन की उम्मीद की जा रही है। साथ ही, यह कहना काफी बढ़ा-चढ़ाकर दावा करना होगा कि इसकी सैन्य क्षमता, सामान्य तौर पर या ताइवान के संबंध में, मजबूत हुई है या कमजोर हुई है।

(द कन्वरसेशन)

देवेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल


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