आखिर पानी गीला क्यों होता है?
आखिर पानी गीला क्यों होता है?
( युन्याओ ली, यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सास, आर्लिंगटन )
आर्लिंगटन (अमेरिका), 28 अप्रैल (द कन्वरसेशन) बारिश के मौसम में जब आप बिना छतरी के भीग जाते हैं, तो “गीलापन” महसूस होता है। लेकिन सवाल यह है कि पानी आखिर गीला क्यों होता है?
वायुमंडलीय वैज्ञानिकों के अनुसार, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के अणुओं से बने पानी की यह विशेषता वास्तव में उसके अणुओं के आपसी व्यवहार और आसपास की चीजों के साथ उनकी प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है।
वैज्ञानिक बताते हैं कि पानी के अणु एक-दूसरे और अन्य पदार्थों से बहुत तेजी से आकर्षित होते हैं। इस गुण को “आसंजन” (एडहेज़न) कहा जाता है। पानी के अणु ध्रुवीय होते हैं, यानी उनके एक छोर पर हल्का धनात्मक और दूसरे छोर पर हल्का ऋणात्मक आवेश होता है। यही कारण है कि वे त्वचा, कपड़े और कांच जैसी सतहों से आसानी से चिपक जाते हैं।
जब पानी किसी सतह के संपर्क में आता है, तो वह उस पर फैल जाता है और मजबूती से चिपक जाता है। इसी वजह से हमें लगता है कि कोई वस्तु “गीली” है। वैज्ञानिकों के अनुसार, गीलापन इस बात पर निर्भर करता है कि कोई द्रव किसी सतह के साथ कितनी अच्छी तरह संपर्क बनाए रखता है।
इसके विपरीत, पारा यानी मरकरी जैसे धातु में सतहों से चिपकने की क्षमता बहुत कम होती है क्योंकि उसके अणु आपस में अधिक मजबूती से जुड़े रहते हैं। इसे “संसंजन” (कोहेज़न) कहा जाता है।
गीलेपन का एक और महत्वपूर्ण पहलू ठंडक का एहसास है। जब पानी या कोई द्रव वाष्पित होता है, तो उसे ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसे वह अपने आसपास की गर्मी से लेता है। इस प्रक्रिया में शरीर या सतह ठंडी महसूस होती है।
इसी कारण जब आप तैराकी के बाद बाहर निकलते हैं और कपड़ों पर लगी पानी की बूंदें वाष्पित होती हैं, तो आपको ठंडक महसूस होती है। यही सिद्धांत पसीने और अल्कोहल वाइप्स पर भी लागू होता है, जो वाष्पीकरण के दौरान शरीर से गर्मी खींच लेते हैं।
कभी-कभी दिखाई नहीं देने वाले पानी के बावजूद भी “गीलापन” महसूस हो सकता है। इसका संबंध वायु में मौजूद जलवाष्प यानी आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) से होता है।
हवा केवल एक सीमित मात्रा में ही जलवाष्प रख सकती है। जब हवा पहले से ही नमी से भरी होती है, तो वाष्पीकरण धीमा हो जाता है, जिससे पसीना आसानी से सूख नहीं पाता और चिपचिपाहट महसूस होती है।
जब हवा पूरी तरह जलवाष्प से संतृप्त हो जाती है, तो वह संघनित होकर ओस या कोहरे के रूप में पानी बन जाती है। तापमान इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है—गर्म हवा अधिक नमी रख सकती है, जबकि ठंडी हवा कम। गर्म हवा की नमी के कारण उमस का अहसास होता है।
छायादार और ठंडी जगहें अधिक नम इसलिए महसूस होती हैं, क्योंकि वहां वाष्पीकरण धीमा होता है।
वैज्ञानिक यह भी बताते हैं कि कभी-कभी हवा में अधिक नमी होने के बावजूद हमें गीलापन महसूस नहीं होता। उदाहरण के लिए, आग जलने की प्रक्रिया में भी जलवाष्प निकलती है, लेकिन उच्च तापमान के कारण हवा अधिक नमी समेट सकती है और चीजें तेजी से सूख जाती हैं।
मौसम विज्ञान में आर्द्रता को मापने के लिए सापेक्ष आर्द्रता अर्थात ‘रिलेटिव ह्यूमिडिटी’ का उपयोग किया जाता है, जिससे यह समझा जाता है कि हवा कितनी “गीली” महसूस होगी।
इस प्रकार, पानी का गीलापन केवल उसके मौजूद होने से नहीं, बल्कि उसके अणुओं की संरचना, सतहों के साथ उनकी प्रतिक्रिया और वातावरण में मौजूद तापमान एवं नमी के संतुलन से जुड़ी एक जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
(द कन्वरसेशन) मनीषा अविनाश
अविनाश

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