अमेरिका, इजराइल के ईरान पर हमलों को लेकर विश्व के नेताओं ने प्रतिक्रिया जतायी

अमेरिका, इजराइल के ईरान पर हमलों को लेकर विश्व के नेताओं ने प्रतिक्रिया जतायी

अमेरिका, इजराइल के ईरान पर हमलों को लेकर विश्व के नेताओं ने प्रतिक्रिया जतायी
Modified Date: March 2, 2026 / 08:20 pm IST
Published Date: March 2, 2026 8:20 pm IST

टोक्यो, दो मार्च (एपी) पश्चिम एशिया में सोमवार को युद्ध के व्यापक रूप से बढ़ने के बीच, अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किये गए हमलों को लेकर विश्व के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी तथा कई देशों ने तेहरान की जवाबी कार्रवाई की निंदा की।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के मारे जाने की घोषणा करते हुए हमलों को ‘‘ईरानी लोगों के लिए अपने देश को वापस लेने का सबसे बड़ा मौका’’ बताया।

संभवतः ट्रंप के साथ पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और नहीं बिगड़ने देने के लिए, कई देशों ने संयुक्त हमलों पर सीधे तौर पर या स्पष्ट टिप्पणी नहीं की, लेकिन तेहरान की जवाबी कार्रवाई की निंदा की। वहीं, कई देशों ने अरब पड़ोसियों पर ईरान के हमलों की आलोचना की, जबकि अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई पर चुप्पी साधे रखी।

हालांकि, कुछ देशों का रुख अधिक स्पष्ट नजर आया। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने अमेरिकी हमलों के लिए खुला समर्थन व्यक्त किया, जबकि रूस, चीन और स्पेन ने सीधे तौर पर आलोचना की।

एक बयान में, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिका और ईरान से बातचीत फिर से शुरू करने का आह्वान किया और कहा कि वे वार्ता के माध्यम से समाधान के पक्षधर हैं।

इन तीनों देशों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने के प्रयासों का नेतृत्व किया है।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को बहरीन के शाह हम्माद बिन ईसा अल खलीफा और सऊदी अरब के युवराज एवं प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत की तथा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान दोनों देशों पर हुए हमलों की निंदा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों पर हुए हालिया हमले उनकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करते हैं।

थाईलैंड के विदेश मंत्रालय ने बातचीत का आह्वान किया और सभी पक्षों से आग्रह किया कि वे स्थिति को और बिगड़ने से रोकें, ताकि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा न पैदा हो और निर्दोष नागरिकों पर असर न पड़े।

ओमान ने एक बयान में कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई ‘‘अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के सिद्धांत का उल्लंघन है…।’’ हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता में मध्यस्थता करने वाले ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी ने कहा कि ‘‘कूटनीति के रास्ते खुले हुए हैं।’’

बाईस देशों के अरब लीग ने ईरानी हमलों को ‘‘उन देशों की संप्रभुता का स्पष्ट उल्लंघन’’ बताया है जो शांति के समर्थन में हैं और क्षेत्र में स्थिरता लाने को प्रयासरत हैं।

छह खाड़ी देशों के शीर्ष राजनयिकों ने ईरान से उनके क्षेत्रों पर हमलों को तुरंत रोकने का आह्वान किया। उनका कहना है कि ये हमले उनकी संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करते हैं।

ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत, ओमान और बहरीन के विदेश मंत्रियों ने रविवार को डिजिटल माध्यम से एक आपातकालीन बैठक की।

हमले के जवाब में, ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हवाई अड्डों, होटलों और कुछ मामलों में आवासीय क्षेत्रों सहित अन्य नागरिक बुनियादी ढांचों पर मिसाइल हमले किये हैं।

पूर्व राष्ट्रपति बशर असद के शासनकाल में सीरिया, ईरान के सबसे करीबी क्षेत्रीय सहयोगियों में से एक था और इजराइल का कट्टर आलोचक था, फिर भी उसके विदेश मंत्रालय के एक बयान में ईरान की विशेष रूप से निंदा की गयी। यह अमेरिका-इजराइल के साथ संबंधों को फिर से बनाने के लिए सीरिया की नयी सरकार के प्रयासों को दर्शाता है।

सऊदी अरब ने कहा कि वह ‘‘ईरानी आक्रामकता, और संप्रभुता के घोर उल्लंघन की कड़ी निंदा करता है।’’

रूस के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को ‘‘संयुक्त राष्ट्र के एक संप्रभु और स्वतंत्र सदस्य देश के खिलाफ पूर्व नियोजित और बिना उकसावे के किया गया आक्रमण’’ बताया।

रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अमेरिका-ईरान वार्ता में हुई प्रगति के बावजूद अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किये गए हमले से मॉस्को चिंतित है।

इसी प्रकार, चीन सरकार ने ईरान पर हुए हमलों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की और सैन्य कार्रवाई को तत्काल रोकने और बातचीत शुरू करने का आह्वान किया।

स्पेन के प्रधानमंत्री ने ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों की निंदा करते हुए तत्काल तनाव कम करने और बातचीत शुरू करने की अपील की।

अमेरिका के साथ हालिया तनाव के बावजूद, कनाडा ने सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, ‘‘ईरान पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और आतंक का मुख्य स्रोत है।’’

ऑस्ट्रेलियाई संसद के उच्च सदन सीनेट ने ईरान के सर्वोच्च नेता के मारे जाने पर शोक व्यक्त करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया, लेकिन अमेरिका और इजराइल को बधाई देने वाले एक अंश को खारिज कर दिया।

जापान की प्रधानमंत्री सनाये ताकाइची ने ईरान पर हुए हमलों के मद्देनजर पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंता को तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि जापान के पास घरेलू स्तर पर तेल भंडार हैं जो कई महीनों तक चल सकते हैं।

फलस्तीनी प्राधिकरण ने एक बयान में अरब देशों पर ईरान के हमलों की निंदा की, हालांकि बयान में इजराइल या अमेरिका के हमलों का कोई जिक्र नहीं किया गया।

यूरोपीय संघ के नेताओं ने शनिवार को एक संयुक्त बयान जारी कर ‘‘परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित करने’’ के लिए संयम और कूटनीति का आह्वान किया।

जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में उनका देश सक्रिय रूप से भाग नहीं लेगा, लेकिन अगर जॉर्डन और इराक में बहुराष्ट्रीय सैन्य ठिकानों पर तैनात उसके सैनिकों पर हमला होता है तो वह उनकी रक्षा करने पर विचार करेगा।

एपी सुभाष नरेश

नरेश


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