बलिराजगढ़ के पुरातात्विक उत्खनन से मिथिला की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत उजागर होगी

बलिराजगढ़ के पुरातात्विक उत्खनन से मिथिला की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत उजागर होगी

बलिराजगढ़ के पुरातात्विक उत्खनन से मिथिला की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत उजागर होगी
Modified Date: February 27, 2026 / 06:05 pm IST
Published Date: February 27, 2026 6:05 pm IST

पटना, 27 फरवरी (भाषा) भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने बिहार के विशालतम पुरातात्विक स्थलों में शामिल बलिराजगढ़ में व्यापक उत्खनन कराने का निर्णय लिया है।

यह जानकारी भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास (इंटैक) के बिहार राज्य के सह-संयोजक एवं पुरातत्वविद् डॉ. शिव कुमार मिश्र ने दी।

उन्होंने कहा कि यह उत्खनन एएसआई के पटना सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. हरिओम शरण के निर्देशन में कराया जाएगा।

डॉ. मिश्र ने कहा कि बलिराजगढ़ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अंतर्गत संरक्षित स्मारक घोषित है और इसके व्यवस्थित उत्खनन की मांग दशकों से की जा रही थी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित उत्खनन से धरती के गर्भ में छिपी मिथिला की ऐतिहासिक एवं गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत सामने आ सकेगी।

डॉ. मिश्र के अनुसार, इससे पहले वर्ष 1962 तथा 2013-14 में एएसआई द्वारा यहां उत्खनन कराया गया था। इसके अलावा बिहार सरकार के पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय ने 1972-73 तथा 1974-75 में भी उत्खनन कार्य कराया था।

हालांकि ये उत्खनन सीमित एवं सांकेतिक स्तर पर ही हुए थे, फिर भी इनमें ‘उत्तरी काले चमकदार मृदभांड’ (एनबीपी) संस्कृति के साक्ष्य प्राप्त हुए थे।

उन्होंने बताया कि यह संस्कृति लगभग साढ़े तीन हजार से तीन हजार वर्ष पूर्व की मानी जाती है। उस काल में विशेष प्रकार के पात्रों के टुकड़ों का उपयोग होता था, जिन्हें ‘नॉर्थ ब्लैक पॉलिश्ड वेयर’ कहा जाता है।

पूर्व में प्राप्त पुरावशेषों के आधार पर डॉ. मिश्र ने कहा कि अनुमान लगाया जा सकता है कि लगभग साढ़े तीन हजार वर्ष पूर्व यहां एक विकसित नगर बसा हुआ था। बलिराजगढ़ की विशाल चहारदीवारी और विस्तृत परिसर को देखकर प्रतीत होता है कि यह किसी शक्तिशाली शासक की राजधानी रही होगी।

उन्होंने कहा कि वाल्मीकि रामायण में वर्णित मिथिला के जनकवंशी राजाओं की राजधानी बलिराजगढ़ में होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। रामायण के अनुसार, भगवान राम, लक्ष्मण और गुरु विश्वामित्र गौतम आश्रम से ईशान कोण की दिशा में चलकर राजा जनक के यज्ञ मंडप में पहुंचे थे।

डॉ. मिश्र ने बताया कि बलिराजगढ़ के व्यापक उत्खनन के लिए जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों द्वारा विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे थे।

इंटैक, पटना चैप्टर के संयोजक भैरव लाल दास और डॉ. शिव कुमार मिश्र ने एएसआई के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि बलिराजगढ़ का पूर्ण उत्खनन कराया जाना चाहिए तथा प्राप्त पुरावशेषों के संरक्षण के लिए स्थल पर ही एक संग्रहालय की स्थापना की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी मांग की कि पूर्व में कराए गए उत्खनन कार्यों की रिपोर्ट शीघ्र प्रकाशित की जाए, ताकि प्राप्त सामग्रियों के संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक हो सके।

भाषा कैलाश संतोष

संतोष


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