गंगा जल बंटवारा संधि का नवीनीकरण न करे केंद्र सरकार : जदयू नेता संजय झा

गंगा जल बंटवारा संधि का नवीनीकरण न करे केंद्र सरकार : जदयू नेता संजय झा

गंगा जल बंटवारा संधि का नवीनीकरण न करे केंद्र सरकार : जदयू नेता संजय झा
Modified Date: September 10, 2026 / 05:06 pm IST
Published Date: September 10, 2026 5:06 pm IST

पटना, 10 सितंबर (भाषा) जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि दिसंबर में समाप्त हो रही गंगा जल बंटवारा संधि का बांग्लादेश के साथ नवीनीकरण नहीं किया जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन दशक से बिहार के हिस्से का पानी ‘चुरा’ कर बांग्लादेश भेजा जा रहा है।

यहां जदयू मुख्यालय में ‘नीतीश संवाद यात्रा’ के पहले चरण के समापन के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए झा ने कहा कि यह मुद्दा बिहार के लिए महत्वपूर्ण है और आरोप लगाया कि राज्य को उसके पानी के पर्याप्त हिस्से से वंचित रखा गया है।

झा ने कहा, ‘‘यह मुद्दा राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जहां भारत के राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर बड़े विवाद होते हैं, वहीं बिहार का पानी 30 वर्षों से चुराकर बांग्लादेश भेजा जा रहा है।’’

‘नीतीश संवाद यात्रा’ के पहले चरण में बक्सर, भोजपुर, बेगूसराय और खगड़िया जिलों को शामिल किया गया। यह यात्रा गंगा किनारे स्थित 12 जिलों से होते हुए कटिहार में समाप्त होगी।

संजय झा, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और पार्टी के अन्य नेता यात्रा के अगले चरण में सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार जिलों का दौरा करेंगे।

राज्यसभा सदस्य झा ने दावा किया कि यात्रा के पहले चरण में जनता का भारी समर्थन मिला, जिससे स्पष्ट है कि यह मुद्दा लोगों के बीच व्यापक रूप से स्वीकार्यता हासिल कर रहा है।

भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर, 1996 को हुई गंगा जल बंटवारा संधि के तहत फरक्का बैराज पर शुष्क मौसम में पानी के प्रवाह के बंटवारे का प्रावधान है। इस संधि की अवधि 30 साल है।

झा ने दावा किया कि संधि के तहत बांग्लादेश को एक जनवरी से 31 मई के बीच 1,500 क्यूमेक पानी सुनिश्चित रूप से मिलता है, जबकि इस अवधि में बिहार के बक्सर में केवल करीब 400 क्यूमेक पानी पहुंचता है। एक क्यूमेक का मतलब प्रति सेकंड 1,000 लीटर पानी होता है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘इसका मतलब है कि बिहार का अपना 1,100 क्यूमेक पानी बांग्लादेश की ओर बहा दिया जाता है।’’

जदयू नेता ने केंद्र से इस संधि का नवीनीकरण नहीं करने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि इसे आगे बढ़ाया जाता है तो वर्ष 2050 तक राज्य की अनुमानित जल जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

उन्होंने 1996 में समझौता किए जाने के समय केंद्र और बिहार की सरकारों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य के लोगों के साथ ‘गंभीर अन्याय’ किया।

जब यह संधि हुई थी, उस समय बिहार के मुख्यमंत्री राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद थे, जबकि केंद्र में संयुक्त मोर्चा सरकार का नेतृत्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा कर रहे थे।

झा ने कहा, ‘‘उस समय के केंद्रीय विदेश मंत्री आईके गुजराल ने बिहार पर पड़ने वाले प्रभावों पर विचार किए बिना संधि पर हस्ताक्षर कर दिए। हमारे नेता नीतीश कुमार लगातार गंगा जल बंटवारा संधि का मुद्दा उठाते रहे हैं, लेकिन उस समय सत्ता में बैठे लोगों ने सरकार बचाने के लिए बिहार के हितों से समझौता किया।’’

उन्होंने फरक्का बैराज के बिहार वाले हिस्से में जमा हो रही गाद को राज्य में बाढ़ की स्थिति बिगड़ने का कारण बताया।

झा ने कहा, ‘‘ फरक्का बैराज के बिहार वाले हिस्से में गाद जमा होना एक जुड़ा हुआ मुद्दा है और राज्य में बाढ़ की स्थिति खराब करने के लिए जिम्मेदार है।’’

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘‘संधि के तहत बांग्लादेश को पानी मिलता है, जबकि बिहार के हिस्से में सिर्फ गाद बचती है।’’

राजद नेता तेजस्वी यादव की ओर से केंद्र से बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और 5,000 करोड़ रुपये की सहायता देने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए झा ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार जी द्वारा विकसित व्यवस्था के तहत सामुदायिक रसोई चलाने से लेकर सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का सख्ती से पालन किया जा रहा है। राजद के शासनकाल में ऐसी व्यवस्थाएं नहीं थीं। उस समय जल बंटवारा संधि पर हस्ताक्षर हो रहे थे और वे सत्ता बचाने के लिए चुप रहे।”

भाषा

कैलाश रवि कांत


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