बिहार में आयोजित होगा हिन्दी साहित्य समागम, देशभर के साहित्यकार होंगे आमंत्रित: मुख्यमंत्री चौधरी

बिहार में आयोजित होगा हिन्दी साहित्य समागम, देशभर के साहित्यकार होंगे आमंत्रित: मुख्यमंत्री चौधरी

बिहार में आयोजित होगा हिन्दी साहित्य समागम, देशभर के साहित्यकार होंगे आमंत्रित: मुख्यमंत्री चौधरी
Modified Date: September 14, 2026 / 07:49 pm IST
Published Date: September 14, 2026 7:49 pm IST

पटना, 14 सितंबर (भाषा) बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को कहा कि हिन्दी के साहित्यिक और सांस्कृतिक विस्तार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में दो दिवसीय हिन्दी साहित्य समागम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के प्रमुख साहित्यकारों, रचनाकारों, कवियों और विद्वानों को आमंत्रित किया जाएगा।

नेहरू पथ स्थित बिहार राज्य अभिलेख भवन के सभागार में मंत्रिमंडल सचिवालय (राजभाषा) विभाग द्वारा आयोजित हिन्दी दिवस समारोह-सह-कवि सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आयोजन की तैयारियां समयबद्ध ढंग से पूरी करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी बयान के अनुसार, चौधरी ने कहा कि हिन्दी दिवस हमें अपनी भाषा के प्रति गौरव और जिम्मेदारी दोनों का बोध कराता है।

उन्होंने कहा कि हिन्दी को केवल सरकारी कार्यक्रमों या एक दिवस तक सीमित रखने के बजाय दैनिक जीवन, व्यवहार और कार्यक्षेत्र में अधिक से अधिक प्रयोग किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा तभी सशक्त होती है, जब समाज का हर वर्ग उसका सहज रूप से उपयोग करे।

उन्होंने कहा कि हिन्दी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की पहचान, संस्कृति, सभ्यता और समृद्ध साहित्यिक परंपरा की अभिव्यक्ति है।

चौधरी ने कहा कि बिहार की धरती ने विद्यापति, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ और जनकवि नागार्जुन जैसे महान साहित्यकार दिए, जिनकी रचनाओं ने हिन्दी साहित्य को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिन्दी दुनिया में सर्वाधिक प्रयोग की जाने वाली भाषाओं में तीसरे स्थान पर है और भारत के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी में दिए गए ऐतिहासिक संबोधन तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों, विशेषकर ब्रिक्स, पर हिन्दी में भारत की बात रखने का उल्लेख करते हुए उनके योगदान की सराहना की।

भाषा कैलाश धीरज

धीरज


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