बिहार में यूसीसी लागू करने के पक्ष में नहीं जदयू : श्याम रजक
बिहार में यूसीसी लागू करने के पक्ष में नहीं जदयू : श्याम रजक
पटना, 14 सितंबर (भाषा) बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी ने भले ही नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़े विधेयक का संसद में समर्थन किया था लेकिन वह इसे राज्य में लागू करने के पक्ष में नहीं है।
जदयू के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रजक ने दावा किया कि इस मुद्दे पर पार्टी का रुख सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।
रजक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे जिसमें उन्होंने एक दिन पहले कहा था कि वर्ष 2029 तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित 22 राज्यों में यूसीसी को लागू कर दिया जाएगा।
रजक ने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर हमारे नेता ने बहुत पहले ही पार्टी का रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा था कि हमारी पार्टी संसद में यूसीसी विधेयक का समर्थन कर रही है, लेकिन बिहार में इसे लागू किए जाने के पक्ष में नहीं है।’’
जदयू के हालांकि कई अन्य नेता इस विवादास्पद मुद्दे पर खुलकर बोलने से बचते नजर आए।
जदयू विधायक दल के नेता एवं मंत्री श्रवण कुमार से यूसीसी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘यह ऐसा मुद्दा है जिस पर हमारी पार्टी के प्रवक्ता बोलेंगे। पहले मैं उनका पक्ष सुनूंगा, फिर कुछ कहूंगा।’’
वहीं, जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘यूसीसी के मुद्दे पर हमारे राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत करेंगे। इसकी जानकारी स्वयं झा ने दी है।’’
इस बीच, प्रमुख विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने आरोप लगाया कि यूसीसी भाजपा की ‘नफरत की राजनीति’ का संकेत है और इससे मुस्लिम समुदाय प्रभावित होगा।
राजद प्रवक्ता शक्ति यादव ने एक बयान में कहा, ‘‘हाल के दिनों में भाजपा को कई राजनीतिक झटके लगे हैं, इसलिए वह एक बार फिर अपनी पुरानी नफरत की राजनीति पर लौट आई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन भाजपा को याद रखना चाहिए कि यह बिहार है, जहां धर्मनिरपेक्षता लोगों की रगों में बहती है। मुसलमानों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कदम उठाया गया तो राजद चुप नहीं बैठेगा। हम बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने देंगे।’’
भाषा कैलाश
धीरज
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