भारत-नेपाल कोसी-गंडक परियोजनाओं पर संयुक्त समिति की बैठक 30 अप्रैल से काठमांडू में

भारत-नेपाल कोसी-गंडक परियोजनाओं पर संयुक्त समिति की बैठक 30 अप्रैल से काठमांडू में

भारत-नेपाल कोसी-गंडक परियोजनाओं पर संयुक्त समिति की बैठक 30 अप्रैल से काठमांडू में
Modified Date: April 29, 2026 / 08:24 pm IST
Published Date: April 29, 2026 8:24 pm IST

पटना, 29 अप्रैल (भाषा) बिहार सरकार की पहल पर भारत-नेपाल कोसी एवं गंडक परियोजनाओं से जुड़े द्विपक्षीय मुद्दों के समाधान, बाढ़ सुरक्षा, सिंचाई व्यवस्था और परियोजनाओं के प्रभावी संचालन को लेकर संयुक्त समिति (जेसीकेजीपी) की 11वीं बैठक 30 अप्रैल और एक मई को काठमांडू में आयोजित होगी।

राज्य के जल संसाधन विभाग की ओर से बुधवार को जारी बयान के अनुसार, भारत और नेपाल से होकर बहने वाली नदियों पर बाढ़ पूर्वानुमान गतिविधियों को लेकर एक संयुक्त बैठक भी एक मई को काठमांडू में होगी।

विभाग ने बताया कि इन बैठकों में दोनों देशों के प्रतिनिधि तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।

बयान के अनुसार कोसी परियोजना के तहत परियोजना क्षेत्र की सुरक्षा, अवसंरचना के रखरखाव, निर्माण सामग्री पर स्थानीय कर, कोसी बैराज के दोनों ओर तटबंधों के कटाव, पश्चिमी मुख्य नहर के गेट संचालन, नेपाल क्षेत्र में सेवा पथों के रखरखाव, अतिक्रमण हटाने, परियोजना कर्मियों की सुरक्षा तथा कोशी टप्पू वन्यजीव क्षेत्र से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी।

गंडक परियोजना से जुड़े मुद्दों में अधिग्रहित भूमि पर अनधिकृत कब्जा, जल निकासी अवरोध के कारण कृषि भूमि में जलजमाव, नहरों में निर्धारित जलस्तर और डिस्चार्ज बनाए रखना, बाढ़ सुरक्षा, कटाव निरोधक कार्य, सेवा पथों का अनुरक्षण तथा सिल्टयुक्त जल प्रवाह नियंत्रण शामिल हैं।

विभाग ने कहा कि मानसून के दौरान बिहार द्वारा संचालित फ्लड फोरकास्टिंग मॉडल के लिए नेपाल क्षेत्र के वर्षा और जलस्तर संबंधी आंकड़ों को एपीआई के माध्यम से साझा करने पर भी चर्चा होगी।

बयान के अनुसार, उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के निर्देश पर विभाग के प्रधान सचिव संतोष मल, अभियंता प्रमुखों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी बैठक में हिस्सा लेंगे।

भारत सरकार की ओर से जल शक्ति मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे। विभाग ने कहा कि बिहार सरकार सीमावर्ती नदियों के समुचित प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और भारत-नेपाल समन्वय को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस बैठक से लंबित मुद्दों के समाधान और भविष्य की कार्ययोजना तय होने की उम्मीद है।

भाषा

कैलाश रवि कांत


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