राहुल राजनीतिक फायदे के लिए खरगे की दलित पहचान का उल्लेख कर रहे हैं: भाजपा नेता

राहुल राजनीतिक फायदे के लिए खरगे की दलित पहचान का उल्लेख कर रहे हैं: भाजपा नेता

राहुल राजनीतिक फायदे के लिए खरगे की दलित पहचान का उल्लेख कर रहे हैं: भाजपा नेता
Modified Date: August 30, 2026 / 07:09 pm IST
Published Date: August 30, 2026 7:09 pm IST

पटना, 30 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर ‘‘भारत को बदनाम करने के लिए अस्पृश्यता के मुद्दे का इस्तेमाल करने’’ और राजनीतिक फायदे के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की दलित पहचान’’ का उल्लेख करने का रविवार को आरोप लगाया।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में खरगे के सभा स्थल के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शनिवार को भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला था और कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया था कि हल्द्वानी में खरगे की रैली के दो दिन बाद 10 अगस्त को भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने यह शुद्धिकरण किया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष ने 13 अगस्त को संसद में यह मुद्दा उठाया था।

गांधी पर निशाना साधते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, ‘‘उनके मन में भारत के प्रति अस्पृश्यता की भावना पैदा हो गई है और वह देश को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। अस्पृश्यता कांग्रेस के भीतर गहराई से जड़ें जमा चुकी है।’’

खरगे के भाषण के बाद हल्द्वानी में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ के बारे में सिंह ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा कि ‘‘अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े बच्चों के एक समूह ने उस स्थान पर एक कार्यक्रम आयोजित किया था।’’

राहुल गांधी पर तंज कसते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘कांग्रेस की समस्या यह है कि वह हर दिन एक सियार को शेर की खाल पहनाने की कोशिश करती है। लेकिन आखिरकार सियार, सियार ही रहता है।’’

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि गांधी के पास अब ‘‘मुद्दे खत्म हो गए हैं’’ और वह ‘‘राजनीतिक फायदे के लिए अपनी पार्टी के अध्यक्ष की दलित पहचान का उल्लेख कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वह अपना होमवर्क नहीं करते और जिस भी मुद्दे को उठाते हैं, उसमें उन्हें हर बार मात मिलती है, चाहे वह वंदे मातरम् का मुद्दा हो, मनुस्मृति का हो या अस्पृश्यता का।’’

इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद मनोज झा ने कार्यक्रम स्थल के कथित शुद्धिकरण को चिंता का विषय बताया।

झा ने कहा, ‘‘जब खरगे जी ने यह मुद्दा उठाया, तब मैं संसद में मौजूद था। जे. पी. नड्डा ने भी खेद व्यक्त किया था। यह पूरा घटनाक्रम बेहद चिंताजनक था। प्रौद्योगिकी के मामले में हमारा समाज काफी आगे बढ़ चुका है, लेकिन वह खुद को मध्ययुगीन विचारों के प्रभाव से मुक्त नहीं कर पाया है।’’

उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से अमेरिका में दिए गए उनके ‘‘हिंदू-मुस्लिम सह-अस्तित्व’’ वाले बयान पर अमल करने और उसका प्रचार-प्रसार करने का आग्रह किया।

झा ने कहा, ‘‘क्या महान विचार हैं! लेकिन मोहन भागवत को भारत की मूल भावना को दर्शाने वाली इस बुनियादी सोच का एहसास अमेरिका जाने के बाद ही हुआ। उन्हें इसे वहीं तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इस संदेश को भारत वापस लाकर उन केंद्रीय मंत्रियों और कुछ मुख्यमंत्रियों के कानों में भी कहना चाहिए, जिनकी सुबह हिंदू-मुस्लिम की बात किए बिना शुरू नहीं होती।’’

भाषा

देवेंद्र दिलीप

दिलीप


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