राज्यसभा चुनाव की रणनीति के लिए तेजस्वी ने महागठबंधन विधायकों की बैठक बुलाई

राज्यसभा चुनाव की रणनीति के लिए तेजस्वी ने महागठबंधन विधायकों की बैठक बुलाई

राज्यसभा चुनाव की रणनीति के लिए तेजस्वी ने महागठबंधन विधायकों की बैठक बुलाई
Modified Date: March 10, 2026 / 01:26 pm IST
Published Date: March 10, 2026 1:26 pm IST

पटना, 10 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने 16 मार्च के लिए निर्धारित राज्यसभा चुनाव से पहले रणनीति तय करने के लिए मंगलवार को पार्टी विधायकों और महागठबंधन के सहयोगी दलों के विधायकों की बैठक बुलाई है। पार्टी के एक नेता ने यह जानकारी दी।

पार्टी ने बताया कि बैठक मंगलवार दोपहर पटना में तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर होगी।

बिहार में राज्यसभा की पांच सीट के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पांच और विपक्षी महागठबंधन का एक उम्मीदवार शामिल हैं।

राज्य में खाली हो रही पांच राज्यसभा सीट में से दो सीट अभी राजद के पास थीं।

हालांकि, 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद के खराब प्रदर्शन को देखते हुए उसने केवल एक सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसी कारण पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद के करीबी सहयोगी प्रेमचंद गुप्ता का टिकट काट दिया गया।

बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में राजद केवल 25 सीट ही जीत सकी।

राजद ने व्यवसायी से नेता बने अमरेंद्र धारी सिंह को राज्यसभा चुनाव के लिए फिर से उम्मीदवार बनाया है।

राजद के प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘महागठबंधन के सभी दलों के विधायकों की बैठक मंगलवार को हमारे नेता तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर होगी। इस बैठक में राज्यसभा चुनाव में राजद उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।’’

विधानसभा में राजग के पास 202 विधायक हैं, हालांकि यह सभी पांच राज्यसभा सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या से तीन कम है।

राजद को महागठबंधन के अन्य दलों के 10 विधायकों का समर्थन प्राप्त है और वह छह वोट की कमी को पूरा करने के लिए हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की पार्टी बसपा के समर्थन की उम्मीद कर रहा है।

हालांकि, इन दोनों दलों ने अभी तक किसी भी राज्यसभा उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा नहीं की है।

बिहार विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है।

मुख्यमंत्री एवं जनता दल-यूनाइटेड (जद-यू) उम्मीदवार नीतीश कुमार तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित सभी छह उम्मीदवारों में से किसी ने भी सोमवार को अपने नामांकन वापस नहीं लिए, जिससे राज्य में एक दशक से अधिक समय बाद राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान कराना आवश्यक हो गया है।

नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि सोमवार थी।

बिहार में इससे पहले राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 2014 में हुआ था, जब जद(यू) के उम्मीदवार एवं पूर्व राजनयिक पवन कुमार वर्मा तथा गुलाम रसूल बलियावी ने पार्टी विधायकों के क्रॉस वोटिंग के बावजूद भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों को हराया था।

भाषा कैलाश खारी

खारी


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