राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 25 जनवरी को पटना में होगी

राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 25 जनवरी को पटना में होगी

राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 25 जनवरी को पटना में होगी
Modified Date: January 20, 2026 / 10:13 pm IST
Published Date: January 20, 2026 10:13 pm IST

पटना, 25 जनवरी (भाषा) पिछले वर्ष बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक अगले सप्ताह बुलाने का निर्णय लिया है, जिसमें “नेतृत्व संबंधी महत्वपूर्ण फैसले” लिए जाने की संभावना है।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के करीबी और राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव द्वारा जारी पत्र के अनुसार यह बैठक 25 जनवरी को पटना के एक होटल में होगी।

राजद के प्रवक्ता चितरंजन गगन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हां, राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 25 जनवरी को होगी। लालू जी सहित पार्टी के सभी शीर्ष नेता इसमें शामिल होंगे। पार्टी नेतृत्व जिन मुद्दों को महत्वपूर्ण समझेगा, उन पर चर्चा की जा सकती है।”

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हालांकि राजद के नेताओं ने पार्टी के तथाकथित ‘पहले परिवार’ के भीतर चल रहे अंतर्कलह को लेकर सतर्कता बरतते हुए चुप्पी साध रखी है, लेकिन नाम न छापने की शर्त पर बोलने वाले कुछ नेताओं ने कहा कि ‘कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष’ की नियुक्ति पर फैसला लिया जा सकता है।

वर्ष 1997 में जनता दल से अलग होकर राजद की स्थापना करने वाले लालू प्रसाद पार्टी की स्थापना के बाद से ही शीर्ष पद पर बने हुए हैं। हालांकि उनकी सर्वोच्चता निर्विवाद है, लेकिन पार्टी सूत्रों का मानना है कि 80 वर्ष से अधिक आयु और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए संगठन के रोजमर्रा के कामकाज के लिए नेतृत्व की दूसरी पंक्ति की जरूरत है।

सूत्रों के अनुसार इस पद के लिए सबसे आगे पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव हैं, जो प्रसाद के छोटे बेटे और उत्तराधिकारी माने जाते हैं।

सूत्रों ने संकेत दिया कि हाल में हुए विधानसभा चुनाव में राजद के बेहद खराब प्रदर्शन ने भाई-बहन के बीच प्रतिद्वंद्विता को भी सतह पर ला दिया है।

उन्होंने कहा कि राजद कार्यकर्ताओं का एक वर्ग मानता है कि यह पद प्रसाद की सबसे बड़ी बेटी मीसा भारती को मिलना चाहिए, जो वर्तमान में पाटलिपुत्र से लोकसभा सांसद हैं।

पार्टी के एक नेता ने कहा, “यह तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर भरोसे की कमी का सवाल नहीं है। सच्चाई यह है कि हमारी प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) लंबे समय से राजद को पितृसत्तात्मक संगठन के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है, जिसमें महिलाओं को उनका हक नहीं मिलता।”

उन्होंने कहा, “चुनाव नतीजों के बाद रोहिणी आचार्य के गुस्से भरे बयानों ने स्थिति और बिगाड़ दी। देखिए कैसे भाजपा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के सभी नेता इस मौके को लपक कर लालू जी पर अपनी बेटियों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाने लगे।”

गौरतलब है कि सिंगापुर में रहने वाली रोहिणी आचार्य चुनाव प्रचार के लिए बिहार आई थीं और नतीजे आने के कुछ दिन बाद यह आरोप लगाते हुए अपने माता-पिता का घर छोड़कर चली गई थीं कि जब उन्होंने तेजस्वी के करीबी कुछ सहयोगियों की भूमिका पर सवाल उठाया तो उनके साथ गाली-गलौज की गई और चप्पल फेंकी गई।

पार्टी सूत्रों ने यह भी कहा कि बैठक में प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को हटाने का मुद्दा भी उठ सकता है। मंडल कुछ वर्ष पहले तक जदयू में थे और उनके राजद में लौटने से अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) वोटों में अपेक्षित सेंध नहीं लग पाई।

भाषा

कैलाश

रवि कांत


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