CG High Court Judgement on Anukampa Niyukti: अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पिता की मौत के बाद इन परिस्थितियों में भी मिलेगी नौकरी, मिली बड़ी राहत
CG High Court Judgement on Anukampa Niyukti: अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पिता की मौत के बाद इन परिस्थितियों में भी मिलेगी नौकरी, मिली बड़ी राहत

CG High Court Judgement on Anukampa Niyukti: अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पिता की मौत के बाद इन परिस्थितियों में भी मिलेगी नौकरी, मिली बड़ी राहत / Image: AI Generated
- शादीशुदा होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता
- निर्भरता हर मामले के तथ्यों और सबूतों के आधार पर तय होगी
- 30 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के आवेदन पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश
बिलासपुर: CG High Court Judgement on Anukampa Niyukti छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि किसी शादीशुदा बेटी को सिर्फ़ इस अनुमान के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए विचार करने से मना नहीं किया जा सकता कि वह अपने पति पर निर्भर है। कोर्ट ने कहा कि निर्भरता एक तथ्य है, जिसे हर मामले में सबूतों के आधार पर तय किया जाना चाहिए।
अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
CG High Court Judgement on Anukampa Niyukti कोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखते हुए अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए उसके आवेदन पर 30 दिन के अंदर नए सिरे से विचार करें। कोर्ट ने फैसले में यह भी कहा कि शादीशुदा होना अपने आप में किसी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के दायरे से बाहर करने का सही आधार नहीं हो सकता, जब तक कि लागू नीति में उसे स्पष्ट रूप से मना न किया गया हो।
शादीशुदा बेटी को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार
याचिकाकर्ता ने अपने पिता की मौत के बाद दया के आधार पर नौकरी के लिए अपनी अर्ज़ी खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। उसके पिता बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र में डिप्टी मैनेजर के तौर पर काम करते थे। बैंक ने उसका दावा इस आधार पर खारिज किया कि शादीशुदा होने के कारण उसे पति पर निर्भर माना जाएगा। इसलिए उसे दिवंगत कर्मचारी के आश्रित परिवार के सदस्य के तौर पर नहीं माना जा सकता। याचिकाकर्ता का तर्क था कि बैंक की नीति में शादीशुदा बेटियों को स्पष्ट रूप से बाहर नहीं रखा गया और असल में वह आर्थिक रूप से अपने पिता पर निर्भर थी।
कोर्ट ने बैंक को दिया निर्देश
बैंक की दया के आधार पर नौकरी की नीति की जांच करने पर कोर्ट ने पाया कि इसमें आश्रित परिवार के सदस्य की परिभाषा में बेटी को शामिल किया गया, जिसमें शादीशुदा और अविवाहित बेटियों के बीच कोई अंतर नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि याचिकाकर्ता ने अपने आवेदन में खास तौर पर कहा कि निजी आर्थिक हालात के कारण वह अपने पिता पर निर्भर थी और बैंक ने इसके उलट कोई सबूत पेश नहीं किया। इसके बजाय बैंक ने सिर्फ़ इस धारणा के आधार पर कार्रवाई की थी कि शादी होने से वह अनिवार्य रूप से अपने पति पर निर्भर हो जाती है।
हाईकोर्ट ने दिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक स्थिति के आधार पर शादीशुदा बेटियों को बाहर रखना संविधान के तहत गलत जेंडर स्टीरियोटाइप (लिंग-आधारित रूढ़िवादी सोच) पर आधारित है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 15(1) का उल्लंघन करता है। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी बेटी को सिर्फ़ शादीशुदा होने के आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता, यह स्पष्ट रूप से मनमाना है।
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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः
उत्तर: हाईकोर्ट ने कहा कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर किसी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के लिए अयोग्य नहीं माना जा सकता।
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और भी पढ़ें...Web Title: CG High Court Judgement on Anukampa Niyukti: Married Daughter also claimant for Compassionate Appointment
बिलासपुर
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